March 25, 2026

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युवा मंच ने कहा-पीपीपी मॉडल लागू हुआ तो गरीबों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे

स्कूलों में 1.26 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं: राजेश सचान

प्रयागराज :  युवा मंच ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के बयान की निंदा की है। युवा मंच ने कहा है कि सरकार का इरादा प्राथमिक शिक्षक भर्ती का कतई नहीं है। युवा मंच संयोजक राजेश सचान ने प्रेस नोट जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की शपथ ली थी तब प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में तकरीबन 4 लाख शिक्षक थे। आज यह संख्या घटकर 3.32 लाख हो गई है।

राजेश सचान ने कहा कि आज एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या में इजाफा हुआ है। अधिकांश स्कूल शिक्षा मित्रों के भरोसे हैं। प्रदेश के 10 हजार स्कूलों में बिजली नहीं है। हजारों स्कूलों में पेयजल जैसी न्यूनतम बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लेकिन योगी सरकार का दावा है कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा का कायाकल्प हो गया है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि परिषदीय स्कूलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।

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युवा मंच के संयोजक ने कहा कि जहां तक बच्चों के रिकॉर्ड नामांकन की बात है उसकी वजह सरकारी स्कूलों का कायाकल्प नहीं बल्कि गरीबों के आर्थिक हालात खस्ताहाल होने से निजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना उनकी सामर्थ्य के बाहर होना है। उन्होंने कहा योगी सरकार द्वारा परिषदीय विद्यालयों में तकरीबन दो लाख स्वीकृत पदों को ही खत्म कर दिया गया। उन्होंने कहा कि छात्र:शिक्षक अनुपात के अनुसार भी 1.26 लाख पद रिक्त हैं। शिक्षा मित्रों व अनुदेशकों को बतौर शिक्षक गिनती करना सुप्रीम कोर्ट के पारित आदेश और संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है।

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पीपीपी मॉडल से गरीबों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे

उन्होंने कहा कि योगी सरकार प्राथमिक विद्यालयों को पीपीपी मॉडल के आधार पर संचालित करने की इच्छुक है, जो और कुछ नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों को बंद कर बेसिक शिक्षा को बाजार के हवाले करना है। परिणामस्वरूप  मंहगी शिक्षा होने से गरीब परिवारों के बच्चें शिक्षा से वंचित हो जायेंगे। लाखों रिक्त पदों के बावजूद शिक्षक भर्ती से इंकार की यही प्रमुख वजह है।

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