February 7, 2026

खबरी चिरईया

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पढ़िए देवरिया के एक ऐसी बेटी का वृतांत, जिसने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपनी दुनिया बदल डाली…

mmalvika

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  • दृढ़ इच्छा शक्ति की बदौलत समाज के लिए प्रेरणा बनी बेटी आध्यात्मिक गुरु के रूप में लोगों का कर रही मार्गदर्शन
  • उत्कृष्ट ज्ञान हासिल करने वाली बेटी को 2023 के बेस्ट इमर्जिंग टैरो रीडर एंड हीलर अवॉर्ड मिल चुका है

खुद में अदम्य साहस और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों से भी लड़कर दूसरों के लिए उम्मीद बना जा सकता है। हम आपको एक बेटी की ऐसी यात्रा से रूबरू करा रहे हैं, जो एक गंभीर बीमारी के कारण एक साल तक बिस्तर पर पड़ी-पड़ी हर पल जीवन और मौत से जूझती रही। एक दिन ऐसा समय आया कि वह अपने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर उठ खड़ी हुई, लेकिन रिश्तों की डोर ने उसे दगा दे दिया। फिर भी वह हारी नहीं, तब तक लड़ती रही जब तक उसने दूसरों के लिए उम्मीद बनने का मुकाम नहीं हासिल कर लिया। आज वह बेटी समाज के लिए प्रेरणा बन गई है और आध्यात्मिक गुरु के रूप में आशा की किरण बनकर लोगों के लिए आत्म-सुधार और आध्यात्मिक विकास की यात्रा पर मार्गदर्शन कर रही है।

ऐसी बेटी को सलाम…जिसने विपरीत परिस्थितियों से लड़कर अपनी दुनिया बदल डाली…। मैं जब इस बेटी से मिला, देखा और उसकी जुबानी उसके जीवन यात्रा का वृतांत सुना तो मेरी आंखें भर आईं। बताया कि वैवाहिक जीवन के बीते कुछ वर्षों में उसने असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ाएं झेलीं। ऐसी परिस्थति में आमतौर पर कोई भी मौत को गले लगाने का रास्ता चुन लेता। उसने कहा मृत्यु कोई विकल्प नहीं। मैंने संघर्ष का रास्ता चुना, सामने आईं मुश्किलों से लड़ती रही…आज मैं जैसे भी हूं खुश हूं। अब मेरे जीवन का एक मात्र उद्देश्य लोगों की मदद करना है। मैंने अंक विज्ञान का आध्यात्मिक ज्ञान अर्जित किया, ताकि लोगों को उनके विपरीत परिस्थिति में सही मार्ग बता कर उनके लिए खुशहाल जीवन यात्रा का मार्ग सुगम कर सकूं…।

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“जीवन जीने, संजोने और साझा करने के लिए है, चाहे कोई भी हो हमें किन्हीं न किन्हीं परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।” एममालविका, टैरो-रीडर (आध्यात्मिक गुरु)

आइए जानते है कि आखिर कौन है वह बेटी…

यूपी के देवरिया जनपद के एक सामाजिक और संभ्रात परिवार में पैदा हुई बेटी के बचपन की किलकारियां खुशहाली के आंगन में गूंजी। परिवार ने एममालविका नाम दिया। ककहरे का ज्ञान सरस्वती शिशु मंदिर से मिला। यहां से कक्षा 4 की पढ़ाई कर प्राथमिक शिक्षा अर्जित करने के बाद राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ से 12वीं तक शिक्षा पूरी कर अपने परिवार का अभिमान बनी। शिक्षा ग्रहण करने की यात्रा आगे बढ़ी और दिल्ली विश्वविद्यालय से हिस्ट्री में आनर्स की और गोरखपुर विश्वविद्यालय से माडर्न हिस्ट्री से एमए की दीक्षा ग्रहण कर विश्वविद्यायल में 2nd टॉपर होने का गौरव प्राप्त किया।

एममालविका की जुबानी जानें जीवन यात्रा का वृतांत..

वर्ष 2008 में एक प्रतिष्ठित परिवार में शादी हुई, जो नोएडा में रहते थे। उस परिवार में एक बेटी को जन्म दिया। सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन समय का ऐसा चक्र चला कि जीवन की खुशियों को ग्रहण लग गया। खुशहाल चल रही जीवन की यात्रा में वर्ष 2012 में एक अप्रत्याशित मोड़ आ गया। गंभीर बीमारी Gullian Barre Syndrome जो एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। यहीं से पीड़ा दायक यात्रा की शुरुआत हो गई। 10 माह की बेटी की देख-रेख और गंभीर बीमारी से लड़ना, दोनों ही चुनौतीपूर्ण था। इसकी वजह से पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो चुका था। तकरीबन ढाई महीने तक वेंटिलेटर पर रही। इन तमाम परिस्थियों में एक खास बात यह रही कि 10 माह की बेटी का चेहरा देखकर जीवन जीने की ललक बढ़ती चली गई।

मरता क्या नहीं करता घर वाले और अन्य परिजन सभी भगवान से यह विनती करते नहीं थकते कि हे प्रभू इसे ठीक कर दो, इसके दु:ख को हर लो। डॉक्टरों की दवाई एक तरफ, दूसरी तरफ ज्योतिष विद्या, पूजा-पाठ, जप-तप घर वालों ने हर जतन किया, लेकिन कहीं से जीवन की आस नजर नहीं आ रही थी। इसी बीच बुआ एक टैरो-रीडर के संपर्क में आईं और पता चला कि जीवन है, वहां से जीवन को आक्सीजन मिला। यह दु:खद पड़ाव अभी पार ही किया था कि अचानक वैवाहिक जीवन यात्रा के खंडन का पहाड़ टूट पड़ा और तलाक का सामना करना पड़ा।

बताया कि विकट परिस्थितियों के बावजूद अदम्य भावना और जीवित रहने की अटूट इच्छा ने मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि वेंटिलेटर पर पड़े रहने व लकवा ग्रस्त होने से मेरा शरीर स्थिर था, लेकिन दिमाग तेज था। इससे अपने आस-पास होने वाली हर चीज़ को सुन और समझ सकती थी। पूरे एक साल तक बिस्तर पर पड़ी रही। जैसे-जैसे समय बीता, ठीक होने की उल्लेखनीय यात्रा शुरू की। गतिशीलता को पुनः प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन दृढ़ संकल्प की बदौलत अपने पैर पर खड़ी हो गई। जीवन में आई प्रतिकूलताओं से विचलित हुए बिना अपने जीवन को फिर से संवारने के मिशन पर काम शुरू कर दिया। एक निजी कंपनी में नौकरी हासिल कर अपनी प्यारी बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अथक प्रयास में जुट गई।

मेरे जीवन को टैरो रीडर से ऑक्सीजन मिला, इसलिए मैंने भी टैरो रीडर यानी आध्यात्मिक ज्ञान हासिल करने का ठान लिया। काम के साथ इसके प्रति अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। समय के साथ इसका ज्ञान अर्जित कर विशेषज्ञता हासिल कर दूसरों का उपचार और आत्म-खोज का मार्ग खोजने में मदद करने के लिए दृढ़ संकल्प किया। दृढ़ संकल्प की देन है कि आज देश और दुनिया भर के हजारों लोगों के साथ मैं जुड़ चुकी हूं। उनके लिए आशा की किरण बन कर उन्हें आत्म-सुधार और आध्यात्मिक विकास की यात्रा का मार्गदर्शन कर रही हूं।

उत्कृष्ट ज्ञान हासिल करने पर मिल चुका है अवॉर्ड

अर्जित की हुई अपनी विद्या में उत्कृष्ट ज्ञान हासिल करने वाली एममालविका को अभी हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक समारोह में ब्रांडइम्पैक्ट राइट च्वॉइस अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया, इसमें इन्हें 2023 के बेस्ट इमर्जिंग टैरो रीडर एंड हीलर के सम्मान से नवाजा गया। इस समारोह की मुख्य अतिथि नेहा धूपिया (पूर्व विश्वसुंदरी) रहीं।

एममालविका की आपबीति इस बात का प्रमाण है कि कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए भी कोई न केवल विजयी हो सकता है बल्कि दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकता है। पक्षाघात से समृद्धि तक की इनकी यात्रा हमें याद दिलाती है कि मानव आत्मा वास्तव में अदम्य है जो अटूट दृढ़ संकल्प और विश्वास के साथ किसी भी बाधा को दूर करने में सक्षम है।

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