राष्ट्रपति ने कहा-पानी हर व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकता और मौलिक मानव अधिकार

नई दिल्ली: पांचवें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।
नई दिल्ली में आयोजित पांचवें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किया
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में पांचवां राष्ट्रीय जल पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पानी को हर व्यक्ति की बुनियादी आवश्यकता और मौलिक मानव अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ जल की उपलब्धता के बिना स्वच्छ और समृद्ध समाज का निर्माण संभव नहीं है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि जल की उपलब्धता और स्वच्छता में कमी से गरीब और सुविधाहीन लोगों के स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पानी की अहमियत को समझते हुए उसके संरक्षण पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
मानवीय उपेक्षा और जल संसाधन प्रबंधन
राष्ट्रपति ने जल संरक्षण की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी पर जल संसाधन सीमित हैं, फिर भी हम इनके संरक्षण को लेकर सतर्क नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मानवीय उपेक्षा से जल संसाधन प्रदूषित और समाप्त हो रहे हैं। सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जल संचयन और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
हमारी परंपरा में जल संरक्षण की भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने तालाबों और जलाशयों का निर्माण कर जल संरक्षण की परंपरा स्थापित की थी। वे गांवों के पास जलाशय बनाते थे, ताकि सूखे के समय संग्रहित जल का उपयोग किया जा सके। उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि आज कुछ लोग निजी स्वार्थवश जलाशयों पर अतिक्रमण कर रहे हैं, जिससे सूखे और बाढ़ दोनों समस्याएं बढ़ रही हैं।
जल संसाधनों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी
राष्ट्रपति ने कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण और संवर्द्धन सामूहिक दायित्व है। उन्होंने लोगों से जल सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हमें नलों को खुला नहीं छोड़ना चाहिए, ओवरहेड टैंक से पानी बर्बाद होने से रोकना चाहिए, घरों में जल संचयन की व्यवस्था करनी चाहिए और पारंपरिक जलाशयों का सामूहिक रूप से जीर्णोद्धार करना चाहिए।
राष्ट्रीय जल पुरस्कार एक प्रासंगिक पहल
राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय जल पुरस्कार को जल संरक्षण के प्रति जागरूकता और प्रासंगिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का सराहनीय कदम बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस पुरस्कार के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ प्रचलन के उपाय लोगों तक पहुंचेंगे और वे इन्हें अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
पुरस्कार की श्रेणियां और उद्देश्य
पांचवां राष्ट्रीय जल पुरस्कार नौ श्रेणियों में प्रदान किया गया। इनमें सर्वश्रेष्ठ राज्य, सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ शहरी स्थानीय निकाय, सर्वश्रेष्ठ स्कूल या कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ उद्योग, सर्वश्रेष्ठ जल उपयोगकर्ता संघ, सर्वश्रेष्ठ संस्थान (स्कूल या कॉलेज के अलावा) और सर्वश्रेष्ठ नागरिक समाज शामिल हैं। इस पुरस्कार का उद्देश्य पानी के महत्व पर जागरूकता उत्पन्न करना और लोगों को स्वच्छ जल के सर्वोत्तम प्रचलन अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
यूपी के ये आईएएस अफसर राष्ट्रपति के हांथों हुए सम्मानित

राष्ट्रपति ने सर्वश्रेष्ठ जिला श्रेणी के अंतर्गत यूपी के बांदा जिले को प्रथम राष्ट्रीय जल पुरस्कार से नवाजा। बांदा जिले में हर घर नल से जल पहुंचाने में मौजूदा कलेक्टर आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल ने काफी सराहनीय भूमिका निभाई थी।

भारत में शानदार जल प्रबंधन के लिए यूपी को राष्ट्रीय जल अवॉर्ड से राष्ट्रपति ने एसीएस नमामि गंगे आइएएस अनुराग श्रीवास्तव और हाउसिंग कमिश्रर आईएएस डॉ. बलकार सिंह को सम्मानित किया।
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