February 7, 2026

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बांधवगढ़ में हाथियों की रहस्यमयी मौत, जांच में जुटीं केंद्र और राज्य सरकारें

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाल ही में दस हाथियों की अचानक और संदिग्ध मौत ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। इस घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) ने एक विशेष टीम गठित की है, जो मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है। साथ ही, राज्य सरकार ने भी पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक और पशु चिकित्सक शामिल हैं। यह समिति एपीसीसीएफ (वन्यजीव) के नेतृत्व में कार्य करेगी।

पृष्ठभूमि: फसल क्षेत्रों में हाथियों का विचरण और मौत की घटना

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29 अक्टूबर को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पतौर और खियातुली रेंज के सलखनिया बीट में गश्ती दल को चार हाथियों के शव मिले। आसपास के क्षेत्रों की तलाशी लेने पर छह अन्य हाथी बीमार या बेहोश अवस्था में पाए गए। इनमें से चार की 30 अक्टूबर को और बाकी दो की 31 अक्टूबर को मृत्यु हो गई। मृत हाथियों में एक नर और नौ मादा थीं, जिनमें से छह किशोर और चार वयस्क थे। जानकारी के अनुसार, तेरह हाथियों का यह झुंड जंगल के आसपास कोदो बाजरा की फसल पर धावा बोल रहा था।

जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष

मृत हाथियों का पोस्टमॉर्टम 14 पशु चिकित्सकों और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने किया। पोस्टमॉर्टम के बाद विसरा को टॉक्सिकोलॉजिकल और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच के लिए आईवीआरआई इज्जतनगर, बरेली और एफएसएल, सागर भेजा गया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि हाथियों की मौत का कारण विषाक्त पदार्थ हो सकता है, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारणों का पता चल सकेगा।

निगरानी और निवारक उपाय

राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक बांधवगढ़ में डेरा डाले हुए हैं और मामले की जांच एवं कार्रवाई की निगरानी कर रहे हैं। अपर वन महानिदेशक (बाघ और हाथी परियोजना) और सदस्य सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने भी स्थलों का दौरा किया और राज्य के अधिकारियों के साथ विभिन्न संबंधित मुद्दों पर चर्चा की। अन्य हाथियों के झुंड की निगरानी बढ़ा दी गई है और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निवारक उपाय किए जा रहे हैं।

निष्कर्ष

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की मौत की यह घटना वन्यजीव संरक्षण के लिए एक गंभीर चुनौती प्रस्तुत करती है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा की जा रही संयुक्त जांच से उम्मीद है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता चलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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