March 19, 2026

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बिहार : महिला अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष के बीच मारपीट

प्रशासनिक गरिमा पर उठे सवाल, महिला अधिकारियों में गुस्सा, घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर पहुंचे, कहा-दोषियों पर कार्रवाई को लेकर खंगाली जा रही है सीसीटीवी फुटेज

बिहार : सीतामढ़ी जिले के परिहार प्रखंड में शनिवार को महिला अंचलाधिकारी मोनी कुमारी और थानाध्यक्ष राजकुमार गौतम के बीच शराब विनष्टीकरण को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मारपीट तक जा पहुंचा। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक गरिमा को ठेस पहुंचाई है, बल्कि महिला अधिकारियों की सुरक्षा और सम्मान पर भी सवाल खड़े किए हैं।

घटना जनता दरबार के दौरान हुई, जब जप्त शराब की काउंटिंग में कमी पाए जाने पर सीओ ने तुरंत विनष्टीकरण का आदेश दिया। थानाध्यक्ष ने इस आदेश पर आपत्ति जताई और कहा कि जप्त शराब में कोई गड़बड़ी नहीं है। बहस इतनी बढ़ गई कि हाथापाई हो गई।

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महिला अंचलाधिकारी ने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष ने उन्हें गालियां दीं, थप्पड़ मारा, मोबाइल छीन लिया और झूठे एससी/एसटी केस में फंसाने की धमकी दी। उन्होंने यह भी कहा कि एक पुलिसकर्मी ने उन्हें जबरन फर्स्ट फ्लोर पर ले जाकर बंद कर दिया। सीओ ने इसे न केवल उनके सम्मान पर हमला बताया, बल्कि प्रशासनिक तंत्र में महिलाओं के प्रति भेदभाव और असुरक्षा का प्रतीक भी कहा।

थानाध्यक्ष ने सीओ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मारपीट की शुरुआत सीओ ने की। उन्होंने दावा किया कि सीओ ने उन्हें चप्पल से मारा और शराब विनष्टीकरण के काम में सहयोग नहीं कर रही थीं। थाने के अन्य कर्मचारियों ने भी सीओ पर आरोप लगाए और उनके व्यवहार को अपमानजनक बताया।

घटना की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

इस घटना के बाद महिला अधिकारियों में आक्रोश है। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण के दावों पर चोट बताया और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। अंचलाधिकारी मोनी कुमारी ने कहा कि यह मामला सिर्फ उनका नहीं है, बल्कि सभी महिला अधिकारियों की गरिमा और सुरक्षा का सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन किया जाएगा।

यह घटना प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करती है। इससे न केवल प्रशासनिक मर्यादा पर सवाल उठे हैं, बल्कि जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंची है। जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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