February 7, 2026

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नाबालिग के अपहरण के झूठे आरोप में फंसे सुनील कुमार को कोर्ट से बड़ी राहत

पटना हाईकोर्ट ने कहा-रिश्तेदारी के आधार पर किसी को अपराधी ठहराना गलत

पटना (बिहार) : पटना हाईकोर्ट ने एक नाबालिग के अपहरण के आरोप में जेल में बंद सुनील कुमार को जमानत देते हुए न्याय की एक मिसाल पेश की। वैशाली जिले के राजापाकड़ थाना कांड संख्या 292/23 के तहत दर्ज इस मामले में सुनील को आरोपी बनाया गया था, लेकिन अदालत ने मामले के तथ्यों को देखते हुए कहा कि सुनील का इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है।

प्रेम कहानी बनी पुलिस कार्रवाई की वजह

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मामले में अधिवक्ताओं शिवेश सिन्हा और अमित कुमार ने कोर्ट को बताया कि नाबालिग लड़की और अनीस कुमार के बीच प्रेम संबंध थे। दोनों ने आपसी सहमति से शादी कर ली थी। पुलिस ने लड़की के परिवार की शिकायत पर अनीस के चचेरे भाई सुनील कुमार को भी आरोपी बना दिया, जबकि सुनील का इस पूरे मामले से कोई लेना-देना नहीं था।

14 मार्च से जेल में थे सुनील कुमार

अधिवक्ताओं ने कोर्ट में यह भी तर्क दिया कि सुनील 14 मार्च से जेल में बंद हैं और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। न्यायमूर्ति चंद्रप्रकाश सिंह की एकलपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल रिश्तेदारी के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी ठहराना अन्यायपूर्ण है।

न्याय की जीत या पुलिस की लापरवाही?

यह मामला केवल एक जमानत आदेश से अधिक है। यह न्यायपालिका के प्रति विश्वास को मजबूत करता है, जबकि पुलिस की लापरवाही और बिना ठोस सबूत के गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का उद्देश्य है दोषियों को सजा देना, न कि निर्दोषों को परेशान करना। इस फैसले ने सुनील कुमार को राहत दी और न्याय की सटीक परिभाषा को स्पष्ट किया।

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