किसानों के लिए समवृद्धि की राह बन रही गेंदे के फूल की खेती

देवरिया जनपद के भाटपाररानी क्षेत्र के बहोरवां गांव निवसी किसान रविशंकर गेंदे की खेती पर 14 हजार निवेश कर बन गए लखपति
सरोकार : अपनी सुंदरता और बहुउपयोगिता के कारण गेंदा फूल न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का हिस्सा है, बल्कि औद्योगिक उपयोग में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। शादी-विवाह, मंदिरों में चढ़ावे और अगरबत्ती निर्माण में इसकी उपयोगिता ने इसे किसानों के लिए एक लाभकारी फसल बना दिया है। गेंदे की खेती किसानों के लिए समवृद्धि की राह बन रही है।
यूपी के जनपद देवरिया जनपद के भाटपाररानी क्षेत्र के बहोरवां गांव निवसी किसान रविशंकर ने गेंदे के फूल की खेती कर किसानों के लिए नजीर बन रहे हैं। महज 12 से 14 हजार रुपए निवेश कर खेती शुरू की और अब अपनी मेहनत से लखपति बन गए हैं।
किसान रविशंकर के बारे में बताया गया कि रविशंकर ने गेंदे की खेती के लिए सरकारी योजना का लाभ उठाया। उद्यान विभाग की अनुसूचित जाति/जनजाति (राज्य सेक्टर) योजना के तहत 0.20 हेक्टेयर खेत में विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में 12 से 14 हाजर रुपए निवेश पर गेंदे की खेती की शुरू की।
बताया गया कि फसल इतनी अच्छी हुई कि करीब एक लाख रुपए से अधिक की आय हुई। रविशंकर ने कहा कि उद्यान विभाग की योजना और समय-समय पर मिली सलाह से खेती में सफलता मिली है। कम लागत में इतना मुनाफा कभी सोचा भी नहीं था।
जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह यादव ने बताया कि देवरिया की जलवायु गेंदे की खेती के लिए अनुकूल है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफे वाली फसलों की ओर प्रेरित किया जाए। गेंदे की खेती से जनपद के किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं और यह फसल उनकी आय को कई गुना बढ़ाने में सक्षम है। अभी 19 किसान गेंदे की व्यवसायिक खेती कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं और गेंदे के फूलों की बढ़ती मांग को पूरा कर रहें हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहा है।
जलवायु अनुकूल, योजना का लाभ उठाएं किसान
“देवरिया की जलवायु गेंदे की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। यहां की मिट्टी और मौसम की परिस्थितियां इस फसल की पैदावार के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं, जिससे कम लागत और मेहनत में भी किसान अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं। उद्यान विभाग की योजना के अंतर्गत किसानों को कुल लागत का 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, जो ₹16,000 प्रति हेक्टेयर तक है। इस योजना ने छोटे और सीमांत किसानों के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। जनपद में मंदिरों और धार्मिक आयोजनों की अधिकता है, गेंदे की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।”
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