March 21, 2026

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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, भारत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में बनेगा विश्व की राजधानी

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में विश्वसनीय देशों में से एक के रूप में उभर रहा है

नई दिल्ली : केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने 5वें सीआईआई अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी (आईईसीई) को संबोधित करते हुए कहा कि भारत न केवल ऊर्जा क्रांति का गवाह बन रहा है बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया की राजधानी बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में विश्वसनीय देशों में से एक के रूप में उभर रहा है।

श्री जोशी ने कहा कि अप्रैल से नवंबर 2024 के बीच भारत ने लगभग 15 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता जोड़ी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी है। नवंबर 2024 में अकेले 2.3 गीगावाट की नई ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई, जो नवंबर 2023 के 566 मेगावाट की तुलना में चार गुना वृद्धि है। भारत की कुल स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता 214 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष से 14 प्रतिशत अधिक है।

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2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री जोशी ने कहा कि भारत, जो वैश्विक कोयला संसाधनों का सबसे बड़ा भंडार रखता है, फिर भी सबसे कम उत्सर्जक देशों में शामिल है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने 2015 के पेरिस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में तय किए गए लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर जी20 देशों के बीच एक अनूठा उदाहरण पेश किया है।

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें 24,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ पीएलआई योजना शामिल है, जिसका उद्देश्य सौर पैनलों और मॉड्यूल के घरेलू निर्माण को प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा 2025-26 तक 38 गीगावाट की संचयी क्षमता के साथ 50 सौर पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी महत्वपूर्ण पहल है, जो 2026-27 तक 1 करोड़ प्रतिष्ठानों को लक्षित कर रही है। इसके लिए सरकार ने 75,021 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

श्री जोशी ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस पहल को दुनिया भर के 120 देशों ने अपनाया है। उन्होंने कहा कि यह वैश्विक भागीदारी भारत की नवीकरणीय ऊर्जा को एक नई दिशा दे रही है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जनवरी में मुंबई में बैंकों, उद्योगों और सरकारी अधिकारियों की एक बैठक का आयोजन किया जाएगा, ताकि ऊर्जा क्षेत्र में आ रही चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके।

इस अवसर पर श्री जोशी ने सीआईआई-ईवाई ऊर्जा परिवर्तन निवेश मॉनिटर रिपोर्ट का भी विमोचन किया। सम्मेलन का विषय “ऊर्जा परिवर्तन पर वैश्विक संवाद” था, जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योग के दिग्गजों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने विश्व के अग्रणी नेताओं और उद्योग हितधारकों को भारत की हरित और टिकाऊ भविष्य की यात्रा में भागीदार बनने का आमंत्रण भी दिया।

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