April 4, 2025

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बहरीन पारा बैडमिंटन चैंपियनशिप में विक्रम ने देश को दिलाया सिल्वर और ब्रॉन्ज

विक्रम कुमार।

विक्रम कुमार।

वर्ल्ड रैंकिंग में 5वें स्थान पर पहुंचे पुपरी के विक्रम, इलाके में जश्न का माहौल

खेल : बहरीन के चमचमाते खेल मैदान में जब भारतीय तिरंगा लहराया और तालियों की गूंज में बिहार के पुपरी सीतामढ़ी का नाम गूंजा, उस पल ने न केवल एक खिलाड़ी की मेहनत को बल्कि उसके संघर्षों को भी सम्मानित कर दिया। उमेश विक्रम कुमार, जिनका बचपन पुपरी की गलियों में बीता, ने अंतरराष्ट्रीय पारा बैडमिंटन चैंपियनशिप में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया।

विक्रम की यह जीत कोई संयोग नहीं थी। यह बरसों की मेहनत, कड़ी ट्रेनिंग और हर मुश्किल परिस्थिति का डटकर सामना करने का नतीजा थी। नगर परिषद जनकपुर रोड स्थित कर्पूरी चौक निवासी विक्रम का जन्म साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता उमेश प्रसाद और मां रीता देवी ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया, चाहे परिस्थितियां कैसी भी रही हों। विक्रम का खेल से जुड़ाव बचपन से था, लेकिन पारा बैडमिंटन की दुनिया में कदम रखने का सफर आसान नहीं था। शारीरिक चुनौतियां विक्रम के लिए कभी रुकावट नहीं बनीं। उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला।

संघर्षों से बनी राह

जब विक्रम ने खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया, उस समय संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती थी। न तो सही ट्रेनिंग की सुविधा थी और न ही जरूरी उपकरण। लेकिन विक्रम की दृढ़ इच्छाशक्ति ने उन्हें आगे बढ़ने से कभी रोका नहीं। पुपरी जैसे छोटे से शहर में जहां खेल सुविधाएं सीमित थीं, वहां से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतना किसी सपने से कम नहीं था।

विक्रम ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की। देशभर के अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेते हुए उन्होंने कई पदक जीते और अपनी काबिलियत साबित की। बहरीन में 10 से 15 दिसंबर तक आयोजित पारा बैडमिंटन इंटरनेशनल चैंपियनशिप उनके करियर का सबसे बड़ा मंच बना।

जीत का सुनहरा पल

पुरुष एकल स्पर्धा में विक्रम ने एक के बाद एक मुकाबले जीतते हुए फाइनल में जगह बनाई और सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। वहीं युगल स्पर्धा में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। इस जीत के साथ विक्रम की वर्ल्ड रैंकिंग सिंगल में 5 और डबल में 6 हो गई, जो उनके जीवन की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

पुपरी में जश्न का माहौल

जैसे ही खबर पुपरी पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग जश्न मनाने लगे, मिठाइयां बांटी गईं और खेल प्रेमियों ने विक्रम को बधाई दी। स्थानीय लोगों का कहना था कि विक्रम ने पुपरी, सीतामढ़ी और बिहार का नाम देशभर में रोशन किया है।

विक्रम की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत की नहीं, बल्कि उन तमाम संघर्षशील युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को साकार करना चाहते हैं। पुपरी के इस लाल ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से कुछ भी असंभव नहीं। विक्रम आज न सिर्फ अपने माता-पिता का गौरव हैं, बल्कि पूरे पुपरी और बिहार के युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं।

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