April 4, 2025

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दुनिया की पहली कैंसर रोकथाम वैक्सीन, रूस ने रचा इतिहास

वैज्ञानिकों का बड़ा कदम, जल्द शुरू होगा मुफ्त वितरण, क्या यह कदम लाखों जिंदगियां बचाने में सफल होगा…?

स्वास्थ्य : रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कैंसर से बचाव के लिए एक नई वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। यह वैक्सीन कैंसर पीड़ितों को नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों को रोग से बचाने के उद्देश्य से दी जाएगी। अगले साल की शुरुआत से इसे रूस के नागरिकों को मुफ्त में उपलब्ध कराने की योजना है। वैक्सीन की घोषणा करते हुए रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के महानिदेशक एंड्री काप्रिन ने इसे चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ी सफलता बताया।

वैक्सीन पर चल रहा प्री-क्लीनिकल ट्रायल

रूस के गामालेया नेशनल रिसर्च सेंटर फॉर एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी के निदेशक एलेक्जेंडर गिंट्सबर्ग के अनुसार, वैक्सीन के शुरुआती परीक्षण पूरे हो चुके हैं। इन परीक्षणों में पाया गया कि यह वैक्सीन न केवल ट्यूमर के विकास को रोकने में सक्षम है, बल्कि संभावित मेटास्टेसिस (कैंसर कोशिकाओं का फैलाव) को भी नियंत्रित करती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह वैक्सीन किन प्रकार के कैंसर के खिलाफ प्रभावी होगी।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में घोषणा की थी कि वैज्ञानिक कैंसर के खिलाफ एक सुरक्षित और प्रभावी टीका विकसित करने के करीब हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वैक्सीन जल्द ही बड़े पैमाने पर लोगों के लिए उपलब्ध होगी।

अभी भी कई सवाल अनुत्तरित

नई वैक्सीन को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह वैक्सीन किस प्रकार के कैंसर से बचाव करेगी। इसके अलावा वैक्सीन का नाम और इसके उपयोग की प्रक्रिया भी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। रूस के इस कदम ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं का ध्यान खींचा है, क्योंकि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ लड़ाई में यह एक अहम मोड़ हो सकता है।

अन्य देशों की भी कोशिशें जारी

कैंसर के इलाज और रोकथाम के लिए अन्य देश भी अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। ब्रिटेन ने जर्मन कंपनी बायोएनटेक के साथ एक समझौता किया है, जो पर्सनलाइज्ड कैंसर ट्रीटमेंट विकसित करने पर केंद्रित है। वहीं, अमेरिका समेत कई अन्य देश कैंसर रोकथाम के लिए जीन आधारित चिकित्सा और इम्यूनोथेरेपी पर शोध कर रहे हैं।

रूस की इस नई वैक्सीन को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों और चिकित्सा विशेषज्ञों की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैक्सीन वास्तव में कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इसे अन्य देशों में भी अपनाया जाएगा।

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