नीली पगड़ी में विदा हुए एक युग के रक्षक

‘मनमोहन सिंह अमर रहें’ के नारे गूंज रहे थे, सादगी और शांति के प्रतीक इस नेता को देश ने अंतिम विदाई दी
नई दिल्ली : दिल्ली के निगमबोध घाट पर आज एक सर्द सुबह, जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पंचतत्व में विलीन हुए, हर तरफ एक गहरी उदासी और सम्मान का माहौल था। उनकी विदाई में ‘मनमोहन सिंह अमर रहें’ के नारे गूंज रहे थे। सादगी और शांति के प्रतीक इस नेता को देश ने अंतिम विदाई दी।
तोपगाड़ी पर सजी उनकी पार्थिव देह और सिर पर सजी नीली पगड़ी-उनकी पहचान का अटूट हिस्सा-उन्हें उनके अंतिम सफर में भी उनकी विरासत के साथ विदा कर रही थी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, सोनिया गांधी, और अनेक नेता इस ऐतिहासिक विदाई के साक्षी बने। उनकी बेटी ने भारी मन से मुखाग्नि दी, और एक युग का अंत हो गया।
एक सादा और महान जीवन
मनमोहन सिंह, जिनकी सादगी और गहराई हर कदम पर झलकती थी, का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनकी पत्नी गुरशरण कौर और तीनों बेटियां—उपिंदर, दमन और अमृत—इस भावुक पल में उनके साथ खड़ी थीं। उनकी बेटी ने मुखाग्नि दी, और परिवार के साथ हजारों लोग इस क्षण में उनकी स्मृतियों को अपने दिलों में संजो रहे थे।
अंतिम सफर @ सम्मान और श्रद्धांजलि
डॉ. सिंह की पार्थिव देह को सुबह उनके आवास से कांग्रेस मुख्यालय ले जाया गया। हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। राहुल गांधी खुद गाड़ी में बैठकर पार्थिव देह के साथ निगमबोध घाट तक पहुंचे। सेना की तोपगाड़ी पर उनकी अंतिम यात्रा शुरू हुई। तीनों सेनाओं ने उन्हें सलामी दी। उनके लिए गूंजते नारों के बीच, उनकी सादगी और सेवा के प्रति सम्मान झलकता रहा।
गुरुवार की वह रात
गुरुवार शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी। 92 वर्षीय मनमोहन सिंह को दिल से जुड़ी समस्या के कारण दिल्ली के एम्स अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन रात 9:51 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई।
नेताओं की श्रद्धांजलि
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “मनमोहन सिंह ने देश को भोजन और रोजगार का अधिकार दिया। उनका जीवन देश के प्रति समर्पण की मिसाल था।” सोनिया गांधी ने भावुक होकर कहा, “उनकी सादगी और गंभीरता का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा, “मनमोहन जी ने हमेशा निःस्वार्थ होकर देश के लिए काम किया।”
एक युग का अंत
डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन संघर्ष, सादगी और कर्तव्यपरायणता की मिसाल था। उनके नेतृत्व में देश ने आर्थिक स्थिरता और विकास की नई दिशा देखी। उनकी नीली पगड़ी सिर्फ उनकी पहचान नहीं, बल्कि उनके शांत और स्थिर नेतृत्व का प्रतीक थी।
आज उनकी विदाई के साथ न केवल एक नेता, बल्कि एक युग का अंत हो गया। उनकी विरासत, उनकी सादगी, और उनका काम हमेशा देश के इतिहास में अमर रहेगा। उनका जीवन सिखाता है कि शांति और दृढ़ता के साथ भी बदलाव लाया जा सकता है।
यह भी पढ़ें..
- आज का दिन क्या लेकर आया है आपकी राशि के लिए…?
- पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन, राष्ट्रीय शोक की घोषणा
- SKMCH में ब्रेन सिस्ट का सफल ऑपरेशन
- डॉ. सीमा से जानें सोरायसिस का सही उपचार
आगे की खबरों के लिए आप हमारी वेबसाइट पर बने रहें..