February 6, 2026

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80 फीसदी तक घट सकती है अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या

वीजा न मिलने और प्रक्रिया में देरी के कारण छात्र कर रहे हैं कनाडा और ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख, अमेरिका अब छात्रों के लिए नहीं रहा पहली पसंद

Khabari Chiraiya New Delhi Desk : भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका की राह अब पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रंप प्रशासन के दोबारा सत्ता में आने के बाद इमिग्रेशन और वीजा नीतियों में जिस तरह की सख्ती देखने को मिल रही है, उसने हजारों भारतीय छात्रों के सपनों को संकट में डाल दिया है। वीजा रिजेक्शन और अपॉइंटमेंट स्लॉट की अनुपलब्धता के कारण अमेरिका जाने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

हर दिन पोर्टल कर रहे हैं रिफ्रेश, फिर भी मिल नहीं रही उम्मीद

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Panchayat Voice

हैदराबाद ओवरसीज कंसल्टेंसी से जुड़े संजीव राय का कहना है कि बीते कई वर्षों में इस बार हालात सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण हैं। आमतौर पर इसी समय छात्र अपने वीजा इंटरव्यू प्रक्रिया को पूरा कर अमेरिका रवाना होने की तैयारी में रहते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग है। छात्र हर दिन वीजा अपॉइंटमेंट स्लॉट के लिए पोर्टल रिफ्रेश कर रहे हैं, फिर भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल रही। कई मामलों में इंटरव्यू सफलतापूर्वक देने के बावजूद वीजा रिजेक्ट हो रहे हैं।

दूसरे देशों की ओर रुख कर रहे हैं छात्र

फीवर कंसल्टेंसी के अरविंद मंडुवा के अनुसार अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले छात्रों की7 संख्या में इस बार करीब 80 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। निराश छात्र अब विकल्प के रूप में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जैसे देशों की ओर रुख कर रहे हैं। वजह सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई हैं…वीजा प्रक्रिया में देरी, अपॉइंटमेंट की कमी और सबसे अहम, यूएस इमीग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट का सेक्शन 214B। इसी धारा के तहत अधिकतर वीजा रिजेक्शन हो रहे हैं।

भविष्य की चिंता और असमंजस

पिछले वर्ष भारत से करीब 3.3 लाख छात्र अमेरिका पढ़ाई के लिए गए थे, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह संख्या इस साल बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। ट्रंप प्रशासन की आक्रामक नीतियों और अमेरिकी एंबेसी की प्रक्रिया में बढ़ती जटिलता ने भारतीय छात्रों में असमंजस और भय दोनों पैदा कर दिए हैं। यह न केवल शिक्षा के क्षेत्र को प्रभावित करेगा, बल्कि भारत-अमेरिका शैक्षणिक संबंधों पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है।

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