March 24, 2026

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बिहार News : शराबबंदी पर बिहार सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

शराबबंदी बिहार सरकार
  • न्यायालय ने आधी रात घर में घुसकर ब्रेथ टेस्ट कराने की वैधता पर भी कड़े सवाल उठाए

Khabari Chiraiya Desk नई दिल्ली : बिहार में लागू शराबबंदी कानून पर सर्वोच्च न्यायालय ने एक बार फिर गहरी नाराज़गी जताते हुए राज्य सरकार को तीखे शब्दों में फटकार लगाई। सुनवाई के दौरान अदालत ने न सिर्फ इस कानून के प्रभावों पर सवाल उठाए, बल्कि यह भी कहा कि शराबबंदी ने पूरे राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा कर दी है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम आम जनता के साथ-साथ न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन तक महसूस कर रहे हैं। अदालत ने चेतावनी भरे लहजे में राज्य सरकार से 2016 से अब तक इस कानून के तहत दर्ज सभी मामलों और अभियोजन कार्यवाहियों का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने को कहा।

न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की द्विसदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार सिंह, अधिवक्ता शिवेश सिन्हा और अधिवक्ता अमृत कुमार ने नरेंद्र कुमार राम की ओर से दलील दी कि शराबबंदी का बोझ पूरे राज्य पर असहनीय दबाव बना चुका है। न्यायमूर्ति करोल ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि वे इस कानून के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता की भी गहराई से समीक्षा करेंगे।

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अदालत ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या राज्य के अधिकारी आधी रात को किसी के घर में घुसकर ब्रेथ एनालाइज़र या चिकित्सकीय जांच के लिए बाध्य कर सकते हैं और क्या यह संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं है। यह सवाल न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि नागरिक अधिकारों और सरकारी अधिकारों के टकराव पर भी एक नई बहस छेड़ देता है।

इस मामले की पृष्ठभूमि में, पटना हाईकोर्ट में अधिवक्ता शिवेश सिन्हा ने केवल ब्रेथ एनालाइज़र की जांच रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने इस साल फरवरी में दिए फैसले में केवल ब्रेथ एनालाइज़र रिपोर्ट पर दर्ज मामलों को अवैध करार दिया था। बिहार सरकार ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट की यह कड़ी टिप्पणी सामने आई है।

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