February 6, 2026

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अमेरिका की व्यापार नीति पर मचा तूफ़ान

टैरिफ
  • भारत पर भारी टैरिफ लगाने के फैसले ने रिश्तों में नई कड़वाहट घोली, अमेरिकी संसद की ही समिति ने उठाए सवाल

Khabari Chiraiya Desk: भारत पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ का असर सिर्फ आर्थिक मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कूटनीतिक रिश्तों को भी हिला गया है। अमेरिका की प्रभावशाली हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने इस फैसले की जमकर आलोचना की है। समिति का कहना है कि ट्रंप का यह कदम भारत जैसे लोकतांत्रिक और रणनीतिक साझेदार को निशाना बनाने वाला है, जिससे न केवल अमेरिकी कंपनियों को घाटा होगा, बल्कि आपसी विश्वास की बुनियाद भी कमजोर होगी।

अमेरिका पर ही सवाल उठाने लगी अमेरिकी समिति

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हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने भारत पर टैरिफ थोपने को ‘गलत और जल्दबाज़ी में उठाया गया कदम’ बताया है। समिति का तर्क है कि इस तरह के निर्णय से न केवल भारतीय संसद जैसी संस्थाओं के साथ संवाद मुश्किल होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से बने सहयोगी ढांचे को भी झटका लगेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक-दोनों दलों के नेताओं ने ट्रंप की नीति को लेकर गंभीर ऐतराज़ जताया है।

‘ट्रंप का यह कदम अमेरिका के हितों के खिलाफ’

समिति का कहना है कि भारत पर टैरिफ थोपने का सीधा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं और व्यापारियों पर पड़ेगा। कई अमेरिकी सांसदों ने चेतावनी दी है कि अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो इसका नतीजा ‘आर्थिक आत्मघात’ साबित होगा। उन्होंने ट्रंप की विदेश नीति को ‘आक्रामक और आत्मविरोधी’ करार देते हुए कहा कि यह रिश्तों को नुकसान पहुंचाने वाली रणनीति है।

रिपब्लिकन खेमे में भी बगावत

सबसे अहम बात यह है कि आलोचना केवल विपक्षी डेमोक्रेट्स तक सीमित नहीं रही। ट्रंप की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 27 सदस्यों ने इस मुद्दे पर अलग राय जताई। उनका मानना है कि इस फैसले ने अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। समिति की बैठकों में रिपब्लिकन सांसद भी इस नीति से असहमत दिखे, जिससे व्हाइट हाउस पर दबाव और बढ़ गया है।

भारत पर 50% तक का टैरिफ बोझ

27 अगस्त से भारत पर 50 प्रतिशत तक का नया अमेरिकी टैरिफ लागू कर दिया गया। इसमें दवा, इस्पात और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कई अहम उत्पाद शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि यह कदम घरेलू उद्योग को बचाने के लिए है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि वास्तविक नुकसान खुद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को झेलना पड़ेगा, क्योंकि भारत ने भी पलटवार करते हुए कई अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है।

कूटनीतिक रिश्तों पर मंडराते बादल

भारत-अमेरिका संबंध पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, व्यापार और तकनीक के मोर्चे पर नई ऊंचाइयों पर पहुंचे थे। लेकिन ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने उस भरोसे पर आंच डाल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह विवाद जल्द सुलझा नहीं तो रणनीतिक साझेदारी पर भी असर पड़ सकता है।

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