March 24, 2026

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मोदी बोले भारत-नेपाल रिश्ते अटूट, कार्की को मिला छह महीने का जनादेश

भारत-नेपाल रिश्ते

काठमांडू में देर रात सत्ता हस्तांतरण हुआ और नई कैबिनेट ने पहली बैठक में चुनावी तैयारी की रूपरेखा तय की

Khabari ChiraiyaDesk: नेपाल ने शुक्रवार देर रात अपनी लोकतांत्रिक यात्रा में नया इतिहास रच दिया। संसद को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया और अगले संघीय चुनाव की तारीख 5 मार्च 2026 तय की गई। इसी रात काठमांडू स्थित राष्ट्रपति निवास में भव्य समारोह में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। शपथ ग्रहण के चंद घंटों के भीतर उन्होंने रात 11 बजे ही कैबिनेट की पहली बैठक बुलाई, संसद भंग के निर्णय को मंजूरी दी और संक्रमणकालीन सरकार की छह महीने की यात्रा का रोडमैप पेश किया। इस कदम के साथ नेपाल एक स्थिर और लोकतांत्रिक भविष्य की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहा है।

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भारत का स्वागत और प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

भारत ने इस राजनीतिक घटनाक्रम पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर सुशीला कार्की को बधाई दी और कहा कि भारत नेपाल की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि भारत इस कदम का स्वागत करता है और यह उम्मीद करता है कि यह निर्णय नेपाल में स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करेगा।

मोदी ने भारत-नेपाल के रिश्तों का उल्लेख करते हुए साझा संस्कृति, भाषा और धर्म को दोनों देशों के बीच ‘अटूट पूल’ बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि मई 2014 से लेकर अब तक वे पांच बार नेपाल का दौरा कर चुके हैं, जबकि नेपाल के प्रधानमंत्रियों ने दस बार भारत यात्रा की है। इन दौरों ने दोनों देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

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नेपाल के लिए ऐतिहासिक क्षण

सुशीला कार्की का प्रधानमंत्री बनना नेपाल के लिए ऐतिहासिक है। वह देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान में कहा कि इस अंतरिम सरकार की जिम्मेदारी सिर्फ सत्ता संचालन नहीं बल्कि देश को पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव की दिशा में ले जाना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्की के नेतृत्व में नेपाल को अस्थिरता से बाहर निकलने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूती देने का मौका मिला है।

नेपाल-भारत संबंधों पर असर

नेपाल की राजनीति में यह परिवर्तन भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। 1751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा साझा करने वाले इन दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ भौगोलिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में भारत और नेपाल के बीच सीमा प्रबंधन, ऊर्जा सहयोग और व्यापारिक समझौतों पर ठोस प्रगति हो सकती है।

आगे की राह

अब सबकी निगाहें छह महीने की इस अंतरिम सरकार पर टिकी हैं कि यह किस तरह चुनावी तैयारी करती है और राजनीतिक दलों के बीच संतुलन बनाए रखती है। नेपाल में आम जनता भी इसे नई शुरुआत मान रही है। काठमांडू की सड़कों पर लोगों ने खुशी जाहिर की और उम्मीद जताई कि यह कदम देश में स्थायी राजनीतिक व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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