March 26, 2026

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चीफ जस्टिस के बयान पर मचा बवाल, जस्टिस गवई ने दी सफाई

खजुराहो के जावरी मंदिर
  • याचिका में मांगी गई भगवान विष्णु की मूर्ति को पुनः स्थापित करने की मांग पर कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया था

Khabari Chiraiya Desk : मध्य प्रदेश के खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को पुनः स्थापित करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया था। सोशल मीडिया पर आलोचना बढ़ने के बाद जस्टिस बी. आर. गवई ने स्पष्ट किया कि उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि वे हर धर्म और आस्था का सम्मान करते हैं और किसी देवता का अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता।

खजुराहो के जावरी मंदिर की याचिका और अदालत की प्रतिक्रिया

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16 सितंबर को दायर याचिका में भगवान विष्णु की सात फुट ऊंची खंडित मूर्ति को पूरी तरह से पुनः स्थापित करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए सुनवाई से इंकार कर दिया कि यह मामला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है। चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता से कहा था-“आप भगवान विष्णु के परम भक्त हैं, उन्हीं से प्रार्थना कीजिए, वही मदद कर सकते हैं।” इस टिप्पणी को सोशल मीडिया पर गलत अर्थों में लिया गया और इसे न्यायपालिका पर हमला करने के रूप में पेश किया गया।

सॉलिसिटर जनरल का बचाव और सोशल मीडिया पर कटाक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायपालिका का बचाव करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर चीफ जस्टिस की टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके फैलाया गया। उन्होंने कहा कि वे चीफ जस्टिस को दस साल से जानते हैं, वे हर धर्मस्थल पर जाते हैं और सभी आस्थाओं का सम्मान करते हैं। मेहता ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “सोशल मीडिया के दौर में हर क्रिया की प्रतिक्रिया नहीं बल्कि गलत प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।”

जस्टिस चंद्रन की टिप्पणी-सोशल मीडिया बन गया है ‘एंटी सोशल मीडिया’

पीठ के दूसरे जज जस्टिस विनोद चंद्रन ने भी सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि गलत सूचनाओं के कारण कई बार न्यायाधीशों को सुनवाई से अलग होना पड़ता है। यह प्रवृत्ति न्यायपालिका और समाज दोनों के लिए खतरनाक है।

याचिकाकर्ता की ओर से भी विरोध

याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील संजय नुली ने भी सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस की टिप्पणी को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और जो बातें उन्होंने कही ही नहीं, वे भी जोड़ी गईं।

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