February 7, 2026

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ठंड बढ़ते ही बच्चों की त्वचा पर संकट गहराया

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  • सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा की वजह से त्वचा अपनी नमी खो देती है और एटोपिक डर्माटाइटिस तेजी से सक्रिय हो जाता है

Khabari Chiraiya Desk : सर्दियों के मौसम में एटोपिक डर्माटाइटिस जैसे दीर्घकालीन त्वचा रोग बच्चों में अधिक सक्रिय हो जाते हैं। ठंडी हवा और कम नमी त्वचा की प्राकृतिक नमी को तेजी से खत्म कर देती है, जिससे त्वचा रूखी, लाल और खुजलीदार हो जाती है। लगातार खुजली करने से यह जगह धीरे धीरे पपड़ीदार हो जाती है और बच्चे को काफी असुविधा होने लगती है।

चर्मरोग विशेषज्ञ डॉक्टर सीमा कुमारी के अनुसार यह समस्या आमतौर पर शिशुओं और छोटे बच्चों में ज्यादा देखी जाती है। कई मामलों में एटोपिक डर्माटाइटिस एक साल की उम्र से पहले ही शुरू हो सकता है। शुरुआत में यह चेहरे, घुटनों के पीछे, गर्दन, केहूनियों, कलाई और पेट जैसे हिस्सों पर दिखाई देता है। धीरे धीरे यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है।

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डॉक्टर सीमा कुमारी बताती हैं कि यह बीमारी संक्रामक नहीं है और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलती, लेकिन सर्दियों में कुछ गलत आदतें इसके लक्षणों को और गंभीर बना देती हैं। अधिक देर तक गर्म पानी से नहलाना, मिलावट वाले या तेज रसायन वाले साबुन और तेलों का इस्तेमाल, रुखरे और सिंथेटिक कपड़े पहनाना तथा धूल या मौसम से जुड़ी एलर्जी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं, जो लक्षणों को भड़का सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह है कि सर्दियों में बच्चों को गुनगुने पानी से ही नहलाएं। नहाने के तुरंत बाद त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगाना बेहद जरूरी है, क्योंकि इससे त्वचा की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। बच्चों को हमेशा सूती और मुलायम कपड़े पहनाएं, ताकि त्वचा पर रगड़ कम पड़े। चेहरे पर हल्का मॉइश्चराइजर और सनस्क्रीन भी लाभकारी हो सकता है। नारियल तेल जैसे प्राकृतिक तेलों से हल्की मालिश करने से भी त्वचा को आराम मिलता है और रूखापन कम होता है।

डॉक्टर सीमा कुमारी चेतावनी देती हैं कि यदि इन सभी उपायों के बावजूद बच्चे की त्वचा पर लालिमा बढ़े, पानी निकलने लगे, खुजली असहनीय हो या किसी प्रकार के विशेष संक्रमण के लक्षण दिखें तो घरेलू नुस्खों पर ही निर्भर रहना ठीक नहीं है। ऐसे मामलों में तुरंत किसी चर्मरोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर सही उपचार शुरू करना जरूरी है, ताकि समस्या बढ़ने से पहले ही उसे नियंत्रित किया जा सके।

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