बिहार : आज महिलाओं की मुट्ठी में आई नई ताकत
- राज्य की 10 लाख महिलाओं के बैंक खाते में 10–10 हजार रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई
✍️एनके मिश्रा✍️
आज का दिन बिहार की उन महिलाओं के लिए खास साबित हुआ है, जो वर्षों से अपने पैरों पर खड़े होने का सपना देख रही थीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डीबीटी के माध्यम से करीब 1000 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की है। 10 लाख महिलाओं के बैंक खाते में 10–10 हजार रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की गई। यह सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस सोच की पुष्टि है जो मानती है कि विकास की असली गति तब पकड़ती है, जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से करीब 1000 करोड़ रुपये की यह राशि उन महिलाओं तक पहुंची है, जो पहले से जीविका समूहों से जुड़ी हैं या छोटे-छोटे उद्यमों की शुरुआत कर चुकी हैं। यह रकम उनके लिए पूंजी, भरोसा और अवसर तीनों का काम करेगी। कोई सिलाई-कढ़ाई बढ़ाएगी, कोई डेयरी या पशुपालन मजबूत करेगी, तो कोई दुकान, फूड प्रोडक्ट या सर्विस बेस्ड काम को आगे ले जाएगी। खास बात यह है कि यह सहायता कर्ज नहीं, बल्कि सहयोग है, जो महिला के नाम और बैंक खाते के सम्मान के साथ जुड़ी है।
जीविका मॉडल ने पहले ही साबित कर दिया है कि जब महिलाएं समूह बनाकर बचत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ती हैं तो गांव की सामाजिक-आर्थिक रफ्तार बदल जाती है। पहले जहां घरेलू काम निपटाकर महिलाएं अपना समय यूं ही बीता देती थीं, वहीं अब बैठकें, प्रशिक्षण, बैंक लिंकिंग और उद्यम संचालन उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। आज ट्रांसफर हुई यह राशि उसी यात्रा का अगला चरण है, जहां महिला सिर्फ घर संभालने वाली नहीं, बल्कि घर चलाने वाली आर्थिक साझेदार बन रही है।
राज्य सरकार का दावा है कि अब तक 1 करोड़ 40 लाख से अधिक महिलाओं के खाते में 10–10 हजार रुपये की राशि पहुंचाई जा चुकी है। यह संख्या बताती है कि योजना का दायरा कितना व्यापक है, लेकिन साथ ही यह सच्चाई भी सामने है कि अभी भी बड़ी संख्या में योग्य महिलाएं लाभ की प्रतीक्षा में हैं। असली परीक्षा यहीं से शुरू होती है–क्या प्रशासन गांव स्तर तक सभी पात्र लाभार्थियों की पहचान ईमानदारी से कर पाएगा, क्या बैंकिंग व्यवस्था आखिरी पंचायत तक बिना परेशानी के काम करेगी और क्या बीच के स्तर पर कोई कागजी जाल या देरी इस भरोसे को चोट नहीं पहुंचाएगी।
आज की यह डीबीटी सिर्फ रुपये भेजने की घटना भर नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास की वैल्यूएशन है। जब किसी महिला के मोबाइल पर मैसेज आता है कि उसके खाते में सरकार से 10 हजार रुपये आए हैं तो यह सूचना उसके पूरे परिवार की सोच बदल सकती है। पति, ससुराल, समाज–सब उसे सिर्फ जिम्मेदारी समझने के बजाय क्षमता के रूप में देखना शुरू करते हैं।
यह भी सच है कि सिर्फ राशि भेजने भर से तस्वीर पूरी नहीं बदलती। प्रशिक्षण, बाज़ार तक पहुंच, स्थानीय स्तर पर सपोर्ट सिस्टम और समय पर मार्गदर्शन भी उतना ही ज़रूरी है। लेकिन यह मानने में संकोच नहीं होना चाहिए कि आज किया गया यह ट्रांसफर उस पुल की मजबूत नींव है, जिस पर खड़ी होकर बिहार की महिलाएं आने वाले सालों में अपने और अपने परिवारों के भाग्य की दिशा बदल सकती हैं।
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