March 20, 2026

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ओडिशा: वंचितों की आवाज रहे रवि राय की याद में राष्ट्रीय सम्मेलन

Orissa
  • पूर्व राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन ने कहा कि उनका व्यक्तित्व सीमाओं में बंधा हुआ नहीं था, बल्कि पूरे देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता था

Khabari Chiraiya Desk : ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर शनिवार को उस क्षण का साक्षी बना जब देशभर से आए समाजवादी नेता और विचारक एक ही मंच पर जुटे और वंचितों की आवाज बने जन नेता रवि राय की विशाल राजनीतिक और वैचारिक यात्रा पर गहन मंथन किया। इस समारोह का वातावरण केवल औपचारिक श्रद्धांजलि का नहीं बल्कि उस ऊर्जावान दौर को फिर से महसूस करने का था जिसमें रवि राय ने अपनी पूरी राजनीति जनता की ताकत और लोकतांत्रिक संस्कारों को मजबूत करने में समर्पित कर दी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल विश्व भूषण हरिचंदन का संबोधन रहा। उन्होंने कहा कि रवि राय केवल एक राजनीतिज्ञ नहीं बल्कि देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाले ऐसे जन नेता थे जिनके व्यक्तित्व ने ओडिशा की सीमाओं को भी पार कर राष्ट्रीय स्तर पर गहरी छाप छोड़ी। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में जरूर पहचाने गए लेकिन उनकी असली पहचान वंचित समूहों की आवाज उठाने वाले निर्भीक नेता की थी।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व जस्टिस और समाजवादी चिंतक टी गोपाल सिंह ने की। उन्होंने भावुक होकर कहा कि रवि राय की राजनीति जाति धर्म और दल से ऊपर थी। उनकी नजर में समाज का हर व्यक्ति समान था। लोकसभा के अध्यक्ष रहने के दौरान उन्होंने विपक्ष के अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी कुर्सी तक दांव पर लगा दी। यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की अनोखी मिसाल है।

इस राष्ट्रीय विचार मंथन में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री दिनेश कुमार सारंगी रामचंद्र केसरी और विज्ञान मोदी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि रवि राय की समाजवादी राजनीतिक यात्रा केवल सिद्धांत तक सीमित नहीं थी बल्कि व्यवहार में भी वह हर कदम पर कमजोर वर्गों के साथ खड़े दिखे। समानता न्याय और लोकतांत्रिक अधिकार उनके पूरे जीवन की धुरी रहे।

समारोह के दौरान डा राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन और बिहार विश्वविद्यालय की ओर से रवि राय को डा राम मनोहर लोहिया सम्मान से सम्मानित किया गया। साथ ही समाजवादी आंदोलन से जुड़े कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी सम्मान दिया गया। आयोजन समिति के संयोजक अभिषेक रंजन सिंह ने दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार मंथन की रूपरेखा और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और बताया कि देशभर से समाजवादी चिंतकों का जुटना इस विचारधारा को नई दिशा देने वाला क्षण है।

दूसरे सत्र में जैविक खेती अभियान के अध्यक्ष और समाजवादी लेखक क्रांति प्रकाश ने वर्तमान पर्यावरणीय संकट पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति की अनदेखी भविष्य के लिए खतरनाक होगी। पत्रकार प्रभात कुमार ने ग्रामीण और आम जनता से जुड़ी बड़ी समस्याओं पर जन अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संचालन जयंत सिंह तोमर ने किया जिन्होंने पूरे आयोजन को संयम और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।

वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि रवि राय सिर्फ राजनेता नहीं थे। वे एक विचार थे और एक ऐसा आंदोलन थे जो आने वाली पीढ़ियों को भी रास्ता दिखाते रहेंगे।

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