बिजनौर में प्रेमी युगल ने फंदे से झूल दी जान
- फांसी लगाकर जान देने की घटना ने पूरे इलाके को कर दिया स्तब्ध
Khabari Chiraiya UP Desk: यूपी के बिजनौर जनपद के चांदपुर क्षेत्र के ग्राम जमालुद्दीन नगर में आज सुबह एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को सदमे में डाल दिया। खेतों से गुजर रहे बच्चों ने पेड़ से लटके दो शव देख चीखते हुए गांव की ओर दौड़ पड़े। कुछ ही मिनटों में खेत लोगों से भर गया और वहां का दृश्य हर किसी की आंखों में डर और शोक छोड़ गया। फंदे पर लटकते हुए मिले शव 21 वर्षीय आशु और 19 वर्षीय शिवानी के थे, जिनकी प्रेम कहानी समाज के दवाब और पारिवारिक निर्णयों के बोझ तले अंतिम सांसें ले चुकी थी।
आशु किसान रविकुमार का दूसरा बेटा था। परिवार में तीन बच्चे हैं, जिनमें बड़ा बेटा दिल्ली में नौकरी करता है और आशु अपने माता-पिता के साथ रहते हुए एसआई की तैयारी कर रहा था। वह पढ़ाई में लगनशील और शांत स्वभाव का युवक माना जाता था। इसी गांव में रहने वाले रामवीर की बेटी शिवानी के साथ उसका प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और साथ रहने का सपना देखते थे।

लेकिन परिस्थितियां उनके खिलाफ थीं। शिवानी के परिवारवालों ने उसका रिश्ता कहीं और तय कर दिया था, और सोमवार को उसकी गोदभराई की रस्म होनी थी। यह बात शिवानी ने आशु को बताई तो वह गहरे सदमे में चला गया। दोनों ने अपने परिवारों के खिलाफ जाने के बजाय एक ऐसा अंत चुन लिया जिसे सोचकर भी रूह कांप उठती है।
जानकारी के अनुसार, रात में दोनों अपने-अपने घरों से चुपचाप निकल गए। गहरे अंधेरे और शांत जंगल में पहुंचकर उन्होंने एक ही फंदा बनाया और साथ-साथ जान दे दी। सुबह जैसे ही ग्रामीणों को इसकी भनक लगी, उनके परिवारवालों के विलाप से पूरा माहौल भारी हो उठा। माता-पिता रोते-रोते बेसुध हो रहे थे और गांव में हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल और शुरुआती जांच इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह मामला आत्महत्या का है। हालांकि, विस्तृत जांच जारी है।
यह घटना न केवल दो परिवारों के लिए विनाशकारी है बल्कि समाज की उन जटिलताओं पर भी सवाल खड़े करती है, जिनमें प्रेम, निर्णय, परिवार और सामाजिक दबाव के बीच युवा अक्सर पिस जाते हैं। बिजनौर के इस गांव में आज सिर्फ मातम है और हर किसी के मन में यही सवाल-क्या इस त्रासदी को रोका जा सकता था?
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