February 6, 2026

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मछुआरों के लिए बड़ी राहत की पहल

बिहार
  • सरकार ने नाव और जाल खरीद पर भारी अनुदान देने की नई योजना शुरू की। राज्य भर के मछुआरों को आधुनिक साधनों से जोड़ने का लक्ष्य

Khabari Chiraiya Desk: राज्य के मछुआरों की आमदनी बढ़ाने और उनकी आजीविका को स्थायी आधार देने की दिशा में बिहार सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक नई सहायता योजना लागू की गई है, जिसके तहत मछुआरों को नाव और जाल खरीदने में सरकारी सहयोग मिलेगा। इस पहल को मछुआरा समुदाय के लिए आर्थिक संबल के रूप में देखा जा रहा है।

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग की ओर से शुरू की गई इस योजना में मछुआरों को आवश्यक उपकरण खरीदने पर बड़ी राहत दी जा रही है। सरकार तय इकाई लागत पर अधिकतम 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराएगी, जिससे लाभुकों पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पारंपरिक मछुआरे आधुनिक संसाधनों से जुड़ सकें और उनकी उत्पादकता में बढ़ोतरी हो।

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योजना के तहत लाभ लेने के इच्छुक मछुआरों को ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 31 दिसंबर तक मौका दिया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रखी गई है, ताकि किसी प्रकार की असुविधा या बिचौलियों की भूमिका न रहे और वास्तविक लाभुकों तक सहायता सीधे पहुंचे।

आवेदन के दौरान मछुआरों को अपनी पहचान और बैंक से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इसमें मोबाइल नंबर, बैंक खाता विवरण, आईएफएससी कोड, आधार से जुड़ी जानकारी और मत्स्य शिकार से संबंधित प्रमाण शामिल हैं। सभी दस्तावेज सही और पूर्ण पाए जाने पर ही आवेदन को मान्य माना जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे पात्र और जरूरतमंद मछुआरों का चयन आसान होगा।

इस योजना में एक व्यक्ति या एक परिवार को केवल एक ही अवयव का लाभ दिया जाएगा। मछुआरे अपनी आवश्यकता के अनुसार लकड़ी की मछली पकड़ने वाली नाव, एफआरपी नाव या फेंका जाने वाला जाल पैकेज में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। अलग-अलग पैकेजों के लिए इकाई लागत तय की गई है, जिस पर सरकार अनुदान प्रदान करेगी। इससे मछुआरे अपनी जरूरत के हिसाब से बेहतर साधन चुन सकेंगे।

लाभुकों का चयन संबंधित जिले में गठित समिति द्वारा किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता उप मत्स्य निदेशक करेंगे। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह नियमसम्मत और पारदर्शी रखने पर जोर दिया गया है। विभाग का दावा है कि इसमें किसी भी तरह की पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश नहीं होगी।

यह योजना राज्य के सभी जिलों में लागू की गई है, जिससे बड़ी संख्या में मछुआरों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल मछुआरों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि मत्स्य उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। लंबे समय में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन को भी नई गति देगा।

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