(बजट-एक) आयात शुल्क में राहत से कैंसर मरीजों और उद्योग जगत को मिलेगा सीधा फायदा।
- निजी उपयोग की वस्तुओं पर दर आधी, गंभीर बीमारियों की दवाओं पर शुल्क माफी
Khabari Chiraiya Desk : संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य शुल्क संरचना को सरल बनाना, घरेलू विनिर्माण को मजबूती देना और निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस बार का फोकस आम उपभोक्ता की राहत, गंभीर रोगियों की सहायता और व्यापार प्रक्रिया को सुगम बनाना बताया गया।
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा निजी उपयोग के लिए आयातित वस्तुओं को लेकर की गई है। सरकार ने सभी शुल्क योग्य वस्तुओं पर प्रशुल्क दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। इससे विदेश से निजी उपयोग के लिए सामान मंगाने वाले उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और सीमा शुल्क ढांचा अधिक युक्तिसंगत बनेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी बड़ी राहत दी गई है। विशेष रूप से कैंसर से पीड़ित रोगियों के लिए 17 औषधियों पर मूल सीमा शुल्क में छूट देने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त सात असाधारण रोगों के उपचार में उपयोग होने वाली औषधियों और विशेष चिकित्सीय पोषण आहार के निजी आयात पर भी आयात शुल्क से छूट का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के आर्थिक बोझ को कम करेगा।
अंतरराष्ट्रीय यात्रा से जुड़े नियमों में भी संशोधन प्रस्तावित किया गया है। यात्रियों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शुल्क मुक्त भत्ते में वृद्धि और अस्थायी रूप से लाई या ले जाई जाने वाली वस्तुओं के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए जाएंगे। इससे यात्रियों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
व्यापार सुगमता के लिए सीमा शुल्क प्रक्रिया में भी कई सुधार प्रस्तावित हैं। टियर 2 और टियर 3 प्राधिकृत आर्थिक प्रचालकों के लिए शुल्क स्थगन अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव रखा गया है। पात्र विनिर्माताओं और आयातकों को भी समान सुविधा देने की योजना है, ताकि वे उच्च स्तर के प्रमाणन की दिशा में आगे बढ़ सकें। सरकार का मानना है कि विश्वास आधारित प्रणाली से उद्योग जगत को अधिक निश्चितता और कार्यगत लचीलापन मिलेगा।
निर्यात प्रक्रिया को तेज करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक सीलिंग का उपयोग करने वाले निर्यात कार्गो को फैक्ट्री परिसर से जहाज तक पूर्ण समाशोधन की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। इससे माल ढुलाई की प्रक्रिया तेज होगी और बंदरगाहों पर अनावश्यक विलंब कम होगा।
कुल मिलाकर सीमा और केंद्रीय शुल्क से जुड़े ये प्रस्ताव आम उपभोक्ता, मरीजों और उद्योग जगत तीनों को राहत देने की दिशा में एक व्यापक कदम माने जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि सरल और पारदर्शी शुल्क ढांचा ही विकसित भारत की आर्थिक आधारशिला बनेगा।
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