(बजट-तीन) हाई स्पीड रेल, सेमीकंडक्टर मिशन, बायोफार्मा शक्ति और पूर्वोत्तर पर विशेष फोकस
- तीन कर्तव्यों पर आधारित रणनीति के साथ पूंजी निवेश, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और कृषि को बड़ा प्रोत्साहन।
Khabari Chiraiya Desk: केंद्रीय बजट 2026-27 को सरकार ने विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट पेश करते हुए कहा कि यह बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों से प्रेरित है। पहला आर्थिक विकास की गति तेज रखना और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूती बनाए रखना, दूसरा लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर उनकी क्षमता बढ़ाना और तीसरा सबका साथ सबका विकास के अनुरूप हर क्षेत्र और समुदाय तक संसाधनों और अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करना।
वित्तीय अनुमान के अनुसार गैर ऋण प्राप्तियां 36.5 लाख करोड़ रुपये और कुल व्यय 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। केंद्र की शुद्ध कर प्राप्तियां 28.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई हैं। सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ और शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 4.4 प्रतिशत से बेहतर है। ऋण से जीडीपी अनुपात भी घटकर 55.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

आर्थिक विकास को गति देने के लिए सरकार ने सात रणनीतिक क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के तहत अगले पांच वर्षों में 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है ताकि भारत को वैश्विक बायोफार्मा विनिर्माण केंद्र बनाया जा सके। तीन नए राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान स्थापित किए जाएंगे और मौजूदा संस्थानों को उन्नत किया जाएगा। एक हजार से अधिक मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल स्थलों का नेटवर्क भी बनाया जाएगा।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 शुरू किया जाएगा। इलेक्ट्रॉनिक कलपुर्जों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संपन्न राज्यों में दुर्लभ धातु गलियारों की स्थापना का प्रस्ताव है। रसायन उत्पादन बढ़ाने के लिए तीन समर्पित केमिकल पार्क बनाए जाएंगे।
वस्त्र क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय फाइबर योजना लाई जाएगी, जिससे प्राकृतिक और मानवनिर्मित दोनों प्रकार के रेशों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। मेगा टेक्सटाइल पार्क और आधुनिक पारंपरिक क्लस्टरों के विकास से रोजगार सृजन की उम्मीद है। खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल के तहत मजबूती दी जाएगी।
अवसंरचना को बढ़ावा देते हुए सार्वजनिक पूंजी व्यय बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये किया गया है। पूर्वी भारत में डानकुनी से सूरत तक नया समर्पित माल गलियारा बनाया जाएगा। सात हाई स्पीड रेल कॉरिडोर मुंबई पुणे, पुणे हैदराबाद, हैदराबाद बेंगलुरु, हैदराबाद चेन्नई, चेन्नई बेंगलुरु, दिल्ली वाराणसी और वाराणसी सिलीगुड़ी के बीच विकसित किए जाएंगे। इनलैंड जलमार्गों और तटीय परिवहन की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए कार्बन कैप्चर और भंडारण तकनीक पर 20 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। शहर आर्थिक क्षेत्रों के विकास के लिए पांच हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के लिए विकसित भारत के लिए बैंकिंग शीर्षक से उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी।
लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने के तहत शिक्षा से रोजगार और उद्यम तक समन्वय स्थापित करने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त स्थायी समिति बनाई जाएगी। अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर तैयार किए जाएंगे और डेढ़ लाख देखभाल सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित होंगे।
पर्यटन और संस्कृति पर भी जोर दिया गया है। 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को अनुभवात्मक सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा। खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से खेल क्षेत्र में व्यापक बदलाव का लक्ष्य है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए मत्स्य पालन, पशुपालन और उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा। पूर्वोत्तर और पूर्वोदय राज्यों में औद्योगिक गलियारे, पर्यटन स्थल और ई बसों की सुविधा विकसित की जाएगी।
प्रत्यक्ष कर क्षेत्र में नया आयकर अधिनियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा 31 मार्च तक बढ़ाई गई है। विदेशी टूर पैकेज पर टीसीएस दर घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है। छोटे करदाताओं के लिए विदेशी संपत्ति घोषणा की छह महीने की योजना लाई जाएगी। आय का गलत विवरण देने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
अप्रत्यक्ष करों में भी कई बदलाव किए गए हैं। व्यक्तिगत उपयोग की आयातित वस्तुओं पर शुल्क 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किया गया है। 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी। ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विमानन और महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर भी राहत प्रदान की गई है।
व्यापार सुगमता के लिए सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को डिजिटल और एकीकृत बनाया जाएगा। दो वर्षों में एकीकृत सीमा शुल्क प्रणाली लागू करने का लक्ष्य है। ई कॉमर्स निर्यात पर मौजूदा मूल्य सीमा हटाकर छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान की जाएगी।
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