नई दिल्ली : देश के चिड़ियाघरों के लिए नई दिशा
- केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 43वीं बैठक में संरक्षण, प्रबंधन और मूल्यांकन पर अहम फैसले
Khabari Chiraiya Desk: केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की 43वीं बैठक ने देश के चिड़ियाघरों के भविष्य को लेकर आज महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। राष्ट्रीय चिड़ियाघर उद्यान में हुई इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की। बैठक में देशभर के चिड़ियाघरों में बाह्य संरक्षण, प्रबंधन प्रभावशीलता और बेहतर प्रशासनिक ढांचे पर व्यापक चर्चा हुई।
मंत्री ने बताया कि देश के सभी चिड़ियाघरों के प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन के दूसरे चरण को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मूल्यांकन प्रक्रिया साक्ष्य आधारित, समग्र और स्वतंत्र है, जिसका उद्देश्य चिड़ियाघरों में उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करना है। बैठक में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से वित्तीय सहयोग की संभावनाओं के अध्ययन के लिए एक उपसमिति गठित करने का निर्णय भी लिया गया। साथ ही, राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की तर्ज पर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की बैठकों की आवृत्ति बढ़ाने पर सहमति बनी।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि चिड़ियाघर केवल पशु प्रदर्शन केंद्र नहीं हैं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जनजागरूकता के महत्वपूर्ण मंच हैं। राष्ट्रीय नीति के अनुरूप यह तय किया गया कि चिड़ियाघरों में आने वाले आगंतुकों में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरणीय संतुलन के प्रति समझ विकसित करने के लिए वार्षिक कार्य योजना और विशेष दिवसों पर आधारित प्रचार गतिविधियां चलाई जाएंगी। प्रजाति आधारित जिम्मेदारियां तय कर संरक्षण को और प्रभावी बनाने पर भी विचार हुआ।
इसी अवसर पर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण का 34वां स्थापना दिवस भी मनाया गया। यह आयोजन मुख्य वन्यजीव संरक्षकों और चिड़ियाघर निदेशकों के सम्मेलन के साथ संपन्न हुआ। केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उद्घाटन सत्र में कहा कि चिड़ियाघर शोध और सीखने का केंद्र भी हैं, जहां पशु व्यवहार, चिकित्सा और संरक्षण पद्धतियों पर गहन अध्ययन किया जाता है। उन्होंने युवा पीढ़ी में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने में चिड़ियाघरों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
मंत्री ने तकनीकी विकास के दौर में चिड़ियाघरों के बेहतर प्रबंधन के लिए आधुनिक साधनों के उपयोग पर बल दिया। उन्होंने राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि आगंतुकों का अनुभव बेहतर हो सके और पशु देखभाल में सुधार आए।
वन महानिदेशक और विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी ने इसे संरक्षण उन्मुख प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
अतिरिक्त महानिदेशक रमेश कुमार पांडे ने कहा कि भारत के 150 से अधिक चिड़ियाघरों में से अधिकांश वन विभागों द्वारा संचालित हैं, जो इसे वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाता है। सदस्य सचिव वी क्लेमेंट बेन ने कहा कि प्राधिकरण ने भारतीय चिड़ियाघरों को पारंपरिक पशु प्रदर्शन केंद्रों से पेशेवर संरक्षण संस्थानों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
दिनभर चले सम्मेलन में आधुनिक प्रबंधन, संरक्षण प्रजनन, पशु चिकित्सा देखभाल, पोषण, स्थिरता और एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण जैसे विषयों पर विचार विमर्श हुआ। पशु, पारिस्थितिकी तंत्र और मानव समुदाय के परस्पर संबंधों को ध्यान में रखते हुए वन्यजीव संरक्षण के लिए समन्वित और वैज्ञानिक कार्रवाई पर जोर दिया गया। यह बैठक देश में चिड़ियाघर प्रबंधन को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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