February 6, 2026

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(World Cancer Day) आज की लापरवाही, कल की बीमारी

  • बदलती जीवनशैली, तंबाकू और लापरवाही बना रही है भारत को अगला बड़ा कैंसर हॉटस्पॉट

Khabari Chiraiya Desk: भारत में कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से उभरता सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। डॉक्टरों की चेतावनी साफ है कि अगर तंबाकू, गुटखा और पान मसाला जैसी आदतों पर रोक नहीं लगी तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। अस्पतालों में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जहां मुंह और जबड़े के कैंसर के कारण जटिल सर्जरी करनी पड़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर किसी भी बड़ी बीमारी से पहले संकेत जरूर देता है, लेकिन लोग उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं और यही चूक जानलेवा साबित होती है।

हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। जागरूकता कार्यक्रम, परामर्श शिविर और स्क्रीनिंग अभियान आयोजित किए जाते हैं। केंद्र सरकार ने कुछ आवश्यक कैंसर दवाओं पर कर में राहत भी दी है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कैंसर का इलाज अब भी महंगा है। कई परिवार इलाज के खर्च से आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद हर मरीज को जीवनदान नहीं मिल पाता। जिन मरीजों में बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ी जाती है, उनके बचने की संभावना अधिक होती है।

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विशेषज्ञों के अनुसार देश में इस समय लगभग 15 लाख कैंसर मरीज हैं और अनुमान है कि 2045 तक यह संख्या 24.5 लाख से अधिक हो सकती है। वैश्विक आंकड़े भी चिंताजनक हैं। वर्ष 2022 में दुनिया भर में लगभग 20 मिलियन नए मामले सामने आए और 9.7 मिलियन लोगों की मृत्यु इस बीमारी से हुई। कुछ रिपोर्टों में तो यह तक कहा गया है कि यदि जीवनशैली और खानपान में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में लगभग हर घर कैंसर से प्रभावित हो सकता है। 2025 के अनुमान बताते हैं कि हर तीन घरों में से एक घर में कैंसर से जूझता व्यक्ति मौजूद है।

बदलती जीवनशैली इस बढ़ते खतरे का बड़ा कारण मानी जा रही है। फास्टफूड, प्रिजर्वेटिव युक्त खाद्य पदार्थ और कम फाइबर वाली डाइट ने पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर के मामलों में वृद्धि की है। खेतों में कीटनाशकों का अधिक उपयोग और दूषित पानी भी जोखिम को बढ़ा रहे हैं। पहले कैंसर को बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब युवा और मध्यम आयु वर्ग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।

पुरुषों में तंबाकू और गुटखा सबसे बड़ा खतरा बने हुए हैं। ओरल और हेड एंड नेक कैंसर के मामलों में भारत की हिस्सेदारी दुनिया में सबसे अधिक बताई जाती है। होंठ, मुंह, गला और पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे सामान्य रूप में सामने आ रहा है। यदि स्तन में गांठ, आकार में बदलाव या असामान्य डिस्चार्ज दिखाई दे तो तुरंत जांच करानी चाहिए, भले ही दर्द न हो। सर्वाइकल कैंसर भी महिलाओं में मृत्यु का एक बड़ा कारण बना हुआ है, हालांकि समय पर स्क्रीनिंग और टीकाकरण से इसे रोका जा सकता है।
फेफड़ों का कैंसर अब केवल धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं है। बढ़ता प्रदूषण और पैसिव स्मोकिंग भी इसके प्रमुख कारण हैं। वहीं युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि लोग पेट की समस्याओं को सामान्य गैस या कब्ज समझकर अनदेखा कर देते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि भारत में 60 से 70 प्रतिशत कैंसर मामलों में सर्जरी आवश्यक हो जाती है। हालांकि एक सकारात्मक पहलू भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगभग 40 प्रतिशत कैंसर को रोका जा सकता है, यदि लोग तंबाकू और शराब से दूरी बनाए रखें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं।

तकनीक और आधुनिक उपचार पद्धतियां लगातार विकसित हो रही हैं, लेकिन असली जीत जागरूकता में है। कैंसर का इलाज संभव है, बशर्ते उसे शुरुआती अवस्था में पहचान लिया जाए। इसलिए सावधानी, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली ही इस साइलेंट किलर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।

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