नई दिल्ली : दस दिन में पलटी बाजी सोना-चांदी के बाजार में मचा उतार चढ़ाव
- दो दिन की तेज उछाल के बाद अचानक भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया
Khabari Chiraiya Desk: नई दिल्ली : पिछले करीब दस दिनों से सोना और चांदी का बाजार मानो रोलर कोस्टर पर सवार है। कभी दाम तेजी से ऊपर भागते हैं तो अगले ही दिन अचानक नीचे फिसल जाते हैं। खरीदार और विक्रेता दोनों असमंजस में हैं। जो लोग खरीदारी का मन बनाते हैं, उनके पहुंचने तक कीमतें ऊंची हो जाती हैं, और जो बेचने का सोचते हैं, वे अगले ही पल गिरावट देखकर ठिठक जाते हैं।
5 फरवरी को इस अस्थिरता ने नया मोड़ लिया। इससे पहले दो दिनों तक सोना और चांदी में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी, लेकिन तीसरे ही दिन बाजार ने करवट बदल ली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और सोना भी तेज दबाव में आ गया। एक किलो चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमी आई, जबकि 24 कैरेट सोना भी फिसलकर नीचे आ गया। सुबह के कारोबार में तो सोने के दाम और भी नीचे स्तर पर ट्रेड करते दिखे।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की। जब कीमतें लगातार ऊपर जाती हैं तो बड़े निवेशक अपनी होल्डिंग बेचकर लाभ सुरक्षित कर लेते हैं। इसी प्रक्रिया ने बाजार में दबाव बढ़ाया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते संकेतों ने भी असर डाला। वैश्विक तनाव में कमी और सुरक्षित निवेश की मांग में हल्की नरमी ने सोने पर दबाव बनाया। निवेशकों ने सोने से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों, जैसे बॉन्ड और शेयर बाजार की ओर रुख किया।
चांदी की चाल और भी अधिक अस्थिर रही। औद्योगिक धातु होने के कारण चांदी पर वैश्विक मांग और आर्थिक संकेतों का गहरा प्रभाव पड़ता है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, कुछ महत्वपूर्ण स्तर टूटने से बिकवाली और तेज हो गई, जिससे कीमतों में एक साथ बड़ी गिरावट देखने को मिली।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल कीमतें स्थिर सपोर्ट स्तर तलाश रही हैं। जब तक मजबूत आधार नहीं बनता, तब तक इस तरह की तेज उठापटक जारी रह सकती है। छोटे निवेशकों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि बाजार का रुख मिनटों में बदल रहा है।
आने वाले दिनों में भी सोना और चांदी अस्थिर रह सकते हैं। यदि वैश्विक संकेत स्थिर होते हैं और निवेशकों का भरोसा लौटता है तो कीमतें संभल सकती हैं। लेकिन यदि फिर से मुनाफावसूली या अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम में बदलाव होता है तो उतार चढ़ाव जारी रहेगा। फिलहाल बाजार का संदेश साफ है कि सावधानी ही सबसे बड़ी रणनीति है।
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