वेतन रुका तो ठहर जाएगी SKMCH की धड़कन
- तीन महीने से भुगतान नहीं, आउटसोर्सिंग कर्मियों की माली हालत बिगड़ी। लैब से लेकर ऑपरेशन थियेटर तक निजी कंपनी के सहारे अस्पताल
Khabari Chiraiya Desk : श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जिसे उत्तर बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल कहा जाता है, इन दिनों एक अलग तरह के संकट से गुजर रहा है। अस्पताल की इमारतें, मशीनें और डॉक्टर अपनी जगह मौजूद हैं, लेकिन जिन हाथों के सहारे रोजाना हजारों मरीजों की सेवा होती है, वे हाथ आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
अस्पताल का बड़ा हिस्सा आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत एक निजी कंपनी उर्मिला प्राइवेट लिमिटेड पर निर्भर है। इसी कंपनी के माध्यम से वार्ड बॉय, शल्य कक्ष सहायक, लैब टेक्नीशियन, ड्रेसर, वेंटिलेशन कर्मी और एक्स-रे टेक्नीशियन जैसे महत्वपूर्ण पदों पर लगभग दो सौ कर्मचारी कार्यरत हैं। अस्पताल के दैनिक संचालन से लेकर आपातकालीन सेवाओं तक में इनकी भूमिका अहम है।

जानकारी के अनुसार इन कर्मियों को पिछले तीन महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। नियमित आय बंद होने से इनकी घरेलू स्थिति डगमगाने लगी है। किराए के मकानों में रहने वाले कई कर्मियों को मकान मालिकों की ओर से दबाव झेलना पड़ रहा है। राशन दुकानदार उधार देने से इनकार कर रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और घर के अन्य जरूरी खर्च प्रभावित हो रहे हैं। आर्थिक असुरक्षा का यह माहौल उनके मनोबल पर भी असर डाल रहा है।
अस्पताल में कार्यरत कर्मियों की संख्या कम नहीं है। करीब 33 लैब टेक्नीशियन, 4 वेंट टेक्नीशियन, 8 एक्स-रे टेक्नीशियन, 8 ड्रेसर, 14 शल्य कक्ष सहायक और 125 वार्ड बॉय विभिन्न विभागों में तैनात हैं। लैब जांच से लेकर ऑपरेशन थियेटर की तैयारियों और मरीजों की देखभाल तक, इनकी जिम्मेदारी व्यापक है। ऐसे में यदि इनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो अस्पताल की सेवाओं पर सीधा असर पड़ना तय है।
कर्मियों का कहना है कि वे मरीजों की सेवा को अपना कर्तव्य मानते हैं, लेकिन लगातार वेतन न मिलने से उनके सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है। काम छोड़ें तो परिवार संकट में और काम जारी रखें तो बिना वेतन के भविष्य अनिश्चित। यह दुविधा अब गंभीर रूप लेती दिख रही है।
एसकेएमसीएच जैसे बड़े अस्पताल में प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। यहां की व्यवस्था काफी हद तक इन आउटसोर्सिंग कर्मियों की मेहनत पर टिकी है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित एजेंसी और प्रशासन शीघ्र पहल कर भुगतान की समस्या का समाधान निकाले, ताकि अस्पताल की सेवाएं निर्बाध चलती रहें और मरीजों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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