वृंदावन: जीवन क्षणभंगुर है समय रहते संभलने का संदेश
- वृंदावन में विशेष सत्संग के दौरान शत्रुघ्न प्रभु जी महाराज ने मानव जीवन की नश्वरता पर किया गहन चिंतन। अहंकार त्यागकर ईश्वर भक्ति में जीवन लगाने का दिया आह्वान
Khabari Chiraiya Desk : वृंदावन की पावन भूमि पर आयोजित एक विशेष आध्यात्मिक वार्ता में शत्रुघ्न प्रभु जी महाराज ने मानव जीवन के वास्तविक स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन जितना मूल्यवान है, उतना ही अस्थायी भी है। इसी सत्य को समझाने के लिए उन्होंने संत कबीर का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत करते हुए बताया कि यह शरीर मिट्टी के कच्चे घड़े की तरह है, जो किसी भी क्षण टूट सकता है।
महाराज ने कहा कि मनुष्य दिनभर इसी शरीर के आधार पर अहंकार करता है, पद और प्रतिष्ठा पर गर्व करता है, परंतु यह नहीं समझता कि यह तन स्थायी नहीं है। जैसे मिट्टी का घड़ा एक हल्की ठोकर से चकनाचूर हो जाता है, वैसे ही जीवन भी एक अनदेखी घटना से समाप्त हो सकता है। जब शरीर ही साथ छोड़ देता है, तब न धन काम आता है, न पद और न ही अभिमान।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि समय रहते जीवन का उद्देश्य समझना आवश्यक है। यह मानव जन्म बड़ी कठिनाई से प्राप्त होता है और इसे केवल भौतिक सुखों में व्यर्थ नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को ईश्वर भक्ति, सद्कर्म और मानव सेवा में लगाए, तो यही उसका सच्चा धन होगा।
सत्संग में उपस्थित श्रद्धालु महाराज के विचारों को सुनकर भावविभोर हो उठे। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जीवन की अनिश्चितता ही मनुष्य को सजग बनाती है। जब तक सांस है, तब तक भक्ति और सदाचार का मार्ग अपनाना ही सच्ची समझदारी है।
अंत में शत्रुघ्न प्रभु जी महाराज ने सभी से आह्वान किया कि अहंकार को त्यागकर विनम्रता और श्रद्धा के साथ जीवन जिएं। यही जीवन का सार है और यही मानव जन्म की सार्थकता भी।
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