February 7, 2026

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पटना छात्रा मामला पर राहुल गांधी का तीखा हमला

Rahul Gandhi
  • सिस्टम पर उठाए गंभीर सवाल, पप्पू यादव की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक प्रतिशोध। इंसाफ़ और जवाबदेही को लेकर बढ़ा सियासी तापमान

Khabari Chiraiya Desk : पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस मामले को लेकर अब राष्ट्रीय राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य की व्यवस्था और सरकार की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनके बयान के बाद यह मुद्दा सिर्फ एक आपराधिक घटना न रहकर व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

राहुल गांधी ने अपने संदेश में कहा कि छात्रा की मौत और उसके बाद की कार्रवाई ने व्यवस्था की गहरी सड़ांध को उजागर कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पीड़ित परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की तो सत्ता का रवैया वही पुराना मॉडल दिखाने लगा जिसमें मामले को भटकाने, परिजनों को दबाव में लेने और आरोपियों को संरक्षण देने की कोशिश की जाती है। उनका कहना है कि यह तरीका लोकतांत्रिक जवाबदेही की भावना के विपरीत है।

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Panchayat Voice

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सांसद पप्पू यादव का भी उल्लेख किया और कहा कि छात्रा के लिए न्याय की आवाज उठाने पर उनकी गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध के रूप में देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी के अनुसार यह कदम उन सभी आवाजों को दबाने की कोशिश है जो सत्ता से जवाब मांग रही हैं। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

राहुल गांधी ने यह भी संकेत दिया कि मामला किसी एक घटना तक सीमित नहीं दिखता। उन्होंने इसे एक खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि समय रहते सच्चाई सामने नहीं लाई गई तो और भी बेटियां ऐसी घटनाओं की शिकार हो सकती हैं। उनके अनुसार यह सिर्फ राजनीति का विषय नहीं बल्कि न्याय, सुरक्षा और सम्मान का प्रश्न है।

राज्य की राजनीति में यह मुद्दा अब संवेदनशील मोड़ ले चुका है। एक ओर सत्ता पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया और कानूनी कार्रवाई का हवाला दे रहा है, वहीं विपक्ष इसे व्यवस्था की विफलता और जवाबदेही के संकट के रूप में पेश कर रहा है। छात्रा की मौत की निष्पक्ष जांच, पप्पू यादव की गिरफ्तारी और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप के बीच यह मामला अब बिहार की बेटियों की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ गया है।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि यह प्रकरण आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक बहस और जन प्रतिक्रिया को जन्म देगा। न्याय की मांग और जवाबदेही का सवाल अब सिर्फ एक परिवार का नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक चिंता का विषय बन चुका है।

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