यूपी में करंट की चपेट में गई एक और मजदूर की जान
- कार्यस्थल पर सुरक्षा इंतजामों की कमी ने छीनी मुजफ्फरपुर के युवक की जिंदगी
Khabari Chiraiya Desk: अलीगढ़ जिले के टप्पल थाना क्षेत्र के घरवारा गांव में घटी एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी विरेंद्र कुमार के पुत्र धीरज कुमार की करंट लगने से मौत हो गई। धीरज मजदूरी के लिए उत्तर प्रदेश गए थे और एक निर्माणाधीन मकान में मिक्सर टीम के साथ लैंटर डालने का काम कर रहे थे।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार कार्य के दौरान रास्ते में झूल रहे बिजली के तारों को हटाने के लिए उन्होंने लाठी से उन्हें ऊपर करने की कोशिश की। इसी दौरान वे हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। तेज करंट लगने से वे बुरी तरह झुलस गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
यह हादसा केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण बनकर सामने आया है। सवाल यह उठता है कि जहां निर्माण कार्य चल रहा था, वहां बिजली के खतरनाक तारों के बीच काम क्यों कराया जा रहा था। क्या सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे, क्या श्रमिकों को जोखिम के बारे में जानकारी दी गई थी या सब कुछ लापरवाही के भरोसे चल रहा था।

मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के बावजूद अब तक पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की है। उनका कहना है कि शिकायत देने के बावजूद कार्रवाई में टालमटोल की जा रही है। इससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजनों का यह भी आरोप है कि प्लांट मालिक या जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
धीरज अपने परिवार का सहारा थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट टूट पड़ा है। अब तक न तो किसी प्रकार का मुआवजा मिला है और न ही कोई सरकारी सहायता। श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए कानूनों और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के बावजूद यदि जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि न्याय नहीं मिला तो यह मामला जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि विकास की रफ्तार में यदि श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाएगा, तो इसकी कीमत मासूम जिंदगियों को चुकानी पड़ेगी।
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