अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति में नई बहस
- विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच पर प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी व्यापार समझौते के नाम पर भारत के किसानों के साथ विश्वासघात किया जा रहा है
Khabari Chiraiya Desk: नई दिल्ली : अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर देश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच पर प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी व्यापार समझौते के नाम पर भारत के किसानों के साथ विश्वासघात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल वर्तमान आर्थिक नीति का प्रश्न नहीं है, बल्कि देश की कृषि व्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है।
राहुल गांधी ने डीडीजी के आयात को लेकर गंभीर चिंता जताई। उनका सवाल है कि डीडीजी आयात का वास्तविक अर्थ क्या है। उन्होंने आशंका जताई कि क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय मवेशियों को आनुवंशिक रूप से संशोधित अमेरिकी मक्का से बने आसवित अनाज अवशेष खिलाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है तो क्या भारत का दुग्ध उत्पादन धीरे धीरे अमेरिकी कृषि उद्योग पर निर्भर नहीं हो जाएगा। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है और करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है।

उन्होंने आनुवंशिक रूप से संशोधित सोया तेल के आयात की अनुमति दिए जाने की संभावना पर भी सवाल उठाया। राहुल गांधी का कहना है कि यदि ऐसे सोया तेल को आयात की अनुमति दी जाती है तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में सोयाबीन उगाने वाले किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। पहले से ही मूल्य दबाव झेल रहे किसान एक और कीमत गिरावट का झटका कैसे सह पाएंगे, इस पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।
राहुल गांधी ने अतिरिक्त उत्पाद शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा। उनका कहना है कि इस शब्द के दायरे में कौन-कौन से उत्पाद शामिल हैं, यह देश को बताया जाना चाहिए। क्या भविष्य में दाल और अन्य फसलों को भी अमेरिकी आयात के लिए खोलने का दबाव बनाया जाएगा। यह आशंका इसलिए जताई जा रही है क्योंकि वैश्विक व्यापार समझौतों के तहत कई देशों ने कृषि बाजारों को धीरे धीरे खोलने के फैसले किए हैं।
गैर व्यापारिक बाधाओं को हटाने की बात पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उनके अनुसार इसका अर्थ क्या भविष्य में भारत पर आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के प्रति अपने रुख को नरम करने का दबाव होगा। क्या सरकारी खरीद व्यवस्था को कमजोर किया जाएगा या न्यूनतम समर्थन मूल्य और बोनस जैसी व्यवस्थाओं पर असर पड़ेगा। यह मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश में न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर पहले से व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस चल रही है।
राहुल गांधी ने यह भी पूछा कि यदि एक बार यह दरवाजा खुल गया तो हर वर्ष इसे और अधिक खुलने से कैसे रोका जाएगा। क्या कोई ठोस रोकथाम व्यवस्था होगी या फिर हर नए समझौते में धीरे-धीरे और अधिक फसलों को बातचीत की मेज पर ला दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसानों को इन सवालों का स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मिलना चाहिए।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक व्यापार में अपनी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और साथ ही घरेलू किसानों की सुरक्षा भी एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाता है। फिलहाल अमेरिकी व्यापार समझौते को लेकर सियासी तापमान बढ़ चुका है और किसानों के भविष्य को लेकर बहस तेज हो गई है।
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