जीवन की बुराइयां शिव पर अर्पित करना ही सच्ची शिवरात्रि
- त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव में उमड़ा आध्यात्मिक जनसैलाब, भव्य शोभायात्रा और नशामुक्ति संदेश से गूंजा नगर
Khabari Chiraiya Desk: बिहार के मुजफ्फरपुर में आमगोला रोड स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के सुख शांति भवन में रविवार को महाशिवरात्रि का पर्व अद्भुत आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। अवसर था 90वीं त्रिमूर्ति शिव जयंती महोत्सव का, जिसने श्रद्धा, चिंतन और आत्मपरिवर्तन की चेतना से पूरे वातावरण को आलोकित कर दिया। सभागार में उपस्थित सैकड़ों भाई बहनों की एकाग्रता और भक्ति भाव इस महापर्व को केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्मजागरण का पर्व बना रहे थे।
बिहार झारखंड की जोनल इंचार्ज राजयोगिनी बीके रानी दीदी ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में महाशिवरात्रि के आध्यात्मिक अर्थ को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि शिवरात्रि केवल उपवास और पूजा का दिन नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मसमर्पण का पावन अवसर है। मंदिरों में हम अक धतूरा और भांग अर्पित करते हैं, परंतु उसका वास्तविक संदेश यह है कि जीवन में जो कांटों के समान चुभने वाली बुराइयां हैं, गलत आदतें हैं, कटु वचन हैं, अहंकार और नकारात्मक सोच है, उन्हें शिव को अर्पित कर देना चाहिए। जब मनुष्य अपनी कमजोरियों को परमात्मा को सौंप देता है, तब उसका जीवन हल्का और निश्चिंत हो जाता है।

दीदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे एक छोटा बच्चा पिता का हाथ पकड़कर निश्चिंत होकर चलता है, वैसे ही यदि हम परमात्मा का हाथ थाम लें तो जीवन की कठिनाइयां हमें विचलित नहीं कर पातीं। उन्होंने काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को पांच खोटे सिक्के बताते हुए कहा कि इन्हें त्यागकर ही मनुष्य देवतुल्य बन सकता है। परमपिता शिव इस धरा पर अवतरित होकर सहज राजयोग के माध्यम से मानव को देव स्वरूप में ढालने की शिक्षा दे रहे हैं।
कार्यक्रम का संचालन बीके कंचन बहन ने किया। उन्होंने गीता के महावाक्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय धर्म ग्लानि और नवसृजन का संधिकाल है। परमात्मा स्वयं सृष्टि के नव निर्माण की पटकथा लिख रहे हैं और यह परिवर्तन गुप्त रूप से घटित हो रहा है। जो इस परिवर्तन को पहचान रहे हैं, वे संयम, सदाचार और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।

समारोह में बीके रानी दीदी, नगर विधायक रंजन कुमार, मेयर निर्मला देवी, शिव शंकर प्रसाद साहू, डॉ एच एन भारद्वाज, डॉ मोती सिन्हा, भारत भूषण बंसल सहित अनेक गणमान्य अतिथियों ने शिव ध्वजारोहण किया। रानी दीदी ने सभी उपस्थित जनों को बुराइयों से मुक्त रहकर सद्गुण धारण करने की प्रतिज्ञा दिलाई। विधायक रंजन कुमार ने कहा कि शिव कृपा से समाज में शांति और सद्भाव बना रहे। मेयर निर्मला देवी ने इस आयोजन को आत्मिक ऊर्जा से भरपूर बताते हुए ब्रह्माकुमारी परिवार के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम के बाद नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बैंड बाजे की मधुर ध्वनि और हर हर महादेव के जयघोष के बीच रथों पर सजी दिव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। एक रथ पर श्री लक्ष्मी नारायण और श्री कृष्ण विराजमान थे, तो दूसरे रथ पर ज्योतिर्लिंग स्वरूप शिव के साथ ब्रह्मा, विष्णु और शंकर की दिव्य छवि दर्शाई गई। भारत माता तिरंगा लेकर अग्रिम पंक्ति में चल रही थीं और कन्याएं कलश लेकर शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थीं।
नशामुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक ने समाज को झकझोरने वाला संदेश दिया। तंबाकू, सिगरेट, शराब और अन्य व्यसनों से दूर रहने की प्रेरणा दी गई और बताया गया कि ये आदतें घर और जीवन को नर्क बना देती हैं।
शोभायात्रा आमगोला सेवाकेंद्र से निकलकर हरिसभा चौक, पानीटंकी चौक, हाथी चौक, अमर सिनेमा रोड, छोटी कल्याणी चौक, पुरानी बाजार, दुर्गा मंदिर चौक, गोला रोड, गांधी चौक, सरैयागंज, सूतापट्टी और अन्य प्रमुख मार्गों से होती हुई पुनः सेवाकेंद्र पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि आत्मपरिवर्तन, नवसृजन और सामाजिक जागरण का संदेश देने वाला आध्यात्मिक अभियान बन गया। महाशिवरात्रि का यह महोत्सव इस बात का सजीव प्रमाण रहा कि जब श्रद्धा के साथ आत्मचिंतन जुड़ता है, तब उत्सव जीवन को नई दिशा दे जाता है।
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