महाशिवरात्रि पर देशभर में गूंजा हर हर महादेव, बाबा गरीबनाथ में उमड़ा आस्था का सैलाब
- आदिदेव की आराधना में डूबा देश, पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं
Khabari Chiraiya Desk : महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर पूरा देश भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आया। मंदिरों की घंटियां, हर हर महादेव के उद्घोष और शिव स्तुति से वातावरण गुंजायमान हो उठा। देशभर के मंदिरों में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर रहे हैं और शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं। गंगा, यमुना और अन्य पावन नदियों के घाटों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।

इसी क्रम में बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भोर से ही भक्त मंदिर परिसर में पहुंचने लगे और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बाबा का आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाशिवरात्रि के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि देशभर के मेरे परिवारजनों को महाशिवरात्रि की ढेरों शुभकामनाएं। मेरी कामना है कि आदिदेव महादेव सदैव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें। उनके आशीर्वाद से सबका कल्याण हो और हमारा भारतवर्ष समृद्धि के शिखर पर विराजमान हो।
मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ मंदिर ख्यातिप्राप्त सिद्ध शिवलिंग के रूप में मान्य है। हालांकि इनके प्राकट्य की सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसके संबंध में कई किंवदंतियां प्रचलित हैं। कहा जाता है कि वर्षों पहले यहां घना जंगल हुआ करता था। एक दिन सफाई के दौरान गरीबनाथ नामक मजदूर की कुदाल शिवलिंग से टकराई और वहां से रक्त की धारा प्रवाहित होने लगी। यह दृश्य देख मजदूर और अन्य लोग भयभीत हो गए। बाद में विचार-विमर्श कर वहां मंदिर की स्थापना की गई। मजदूर के नाम पर ही भोलेनाथ गरीबनाथ के रूप में विख्यात हो गए। शिवलिंग पर आज भी कटाव के निशान दिखाई देते हैं।
प्रारंभ में मंदिर मात्र दो कट्ठा जमीन में बना था और बरसात के दिनों में शिवलिंग जलमग्न हो जाया करता था। यह स्थिति शहरवासियों को व्यथित करती थी और सावन के अलावा अन्य मौसम में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित रहती थी। वर्ष 2006 में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने मंदिर का अधिग्रहण किया और बेहतर प्रबंधन के लिए समिति गठित की गई। सबसे पहले गर्भगृह का विस्तार किया गया, उसके बाद मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ।
आज बाबा गरीबनाथ मंदिर विशाल और भव्य स्वरूप में दिखाई देता है। मंदिर परिसर में स्थित कल्पवृक्ष को विशेष महत्व प्राप्त है, जिसे शिवलिंग से भी अधिक प्राचीन माना जाता है। श्रद्धालु यहां कल्पवृक्ष की भी पूजा करते हैं।
मंदिर के प्रशासक सह प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक के अनुसार प्रतिदिन हजारों भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सालभर में लगभग दो सौ शादियां मंदिर परिसर में संपन्न होती हैं और विवाह के लिए विशेष मुहूर्त देखने की परंपरा नहीं है। प्रतिदिन दो सौ से अधिक श्रद्धालु सत्यनारायण भगवान की पूजा भी कराते हैं। संभवत देश का यह पहला मंदिर है जहां इतनी संख्या में नियमित पूजा-अर्चना होती है।
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