असम में विकास और सुरक्षा का डबल संदेश
- एयरस्ट्रिप से लेकर ब्रह्मपुत्र पर बने नए सेतु तक, असम में विकास और सुरक्षा का संदेश साथ-साथ दिया गया
Khabari Chiraiya Desk: असम में चुनावी सरगर्मी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ताजा दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। एक ओर विधानसभा चुनाव की आहट है तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को मजबूती देने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात। यही वजह है कि इस दौरे को सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रम मानना अधूरा होगा।
प्रधानमंत्री डिब्रूगढ़ के पास मोरान बाईपास पर बनी 4.2 किलोमीटर लंबी हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी के उद्घाटन के लिए पहुंचे। यह देश की पहली ऐसी हाईवे एयरस्ट्रिप है जहां सामान्य दिनों में वाहन चलेंगे, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे कुछ ही समय में रनवे में बदला जा सकेगा। प्रधानमंत्री का विमान भी इसी स्ट्रिप पर उतरा। वह भारतीय वायुसेना के C 130 सुपर हरक्यूलिस विमान से यहां लैंड हुए। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने शक्ति प्रदर्शन किया, जिसमें करीब 20 मिनट के भीतर 16 विमानों ने टेकऑफ और लैंडिंग की। सुखोई 30, राफेल और AN 32 जैसे विमान आसमान में पराक्रम दिखाते नजर आए।

रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थान चीनी सीमा से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर है। विशेषज्ञ इसे सीमावर्ती इलाकों में भारत की सैन्य तैयारी का संकेत मान रहे हैं। यह स्ट्रिप 40 टन वजनी लड़ाकू विमानों और 74 टन तक के भारी मालवाहक विमानों का भार सहने में सक्षम है।
इसी दौरे में प्रधानमंत्री ने ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु को भी राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग 3030 करोड़ रुपये की लागत से बना यह छह लेन का पुल गुवाहाटी और नॉर्थ गुवाहाटी के बीच सफर को घटाकर करीब सात मिनट कर देगा। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए एनडीए सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लगातार असम दौरे और बड़े उद्घाटन चुनावी रणनीति का हिस्सा हैं। वर्ष 2021 में असम की 126 सीटों पर तीन चरणों में मतदान हुआ था और 2 मई को नतीजे आए थे। 10 मई 2021 को डाक्टर हिमंत बिश्व शर्मा ने 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
अब फिर से चुनावी तैयारी तेज है। भाजपा जहां विकास को मुख्य मुद्दा बनाकर आगे बढ़ रही है, वहीं कांग्रेस भी पूरी ताकत से मैदान में उतर चुकी है। माना जा रहा है कि इस बार का मुकाबला आसान नहीं होगा।
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