3 मार्च को होलिका दहन और चंद्र ग्रहण का विशेष संयोग
- भारत में सीमित समय के लिए दिखेगा ग्रहण। सुबह से प्रभावी रहेगा सूतक काल, शाम को होगा होलिका दहन
Khabari Chiraiya Desk : 3 मार्च का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन एक ओर होलिका दहन का पर्व मनाया जाएगा, वहीं वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण भी घटित होगा। दोनों घटनाएं एक ही दिन पड़ने से श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता के साथ सावधानियों को लेकर भी चर्चा तेज है।
ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर आरंभ होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण की खग्रास अवस्था शाम 4 बजकर 34 मिनट से शुरू होगी, जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाएगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी।
हालांकि भारत में यह ग्रहण पूरे समय दिखाई नहीं देगा। इस दिन चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा, जबकि ग्रहण 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो जाएगा।

इस कारण भारतीय दर्शकों को यह दृश्य लगभग 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। अलग अलग शहरों में चंद्रोदय का समय कुछ मिनटों के अंतर से बदल सकता है, जिससे दृश्य अवधि में थोड़ा अंतर संभव है। उदाहरण के लिए दिल्ली में भी चंद्रोदय लगभग 6 बजकर 22 मिनट पर होगा।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार चंद्र ग्रहण से नौ घंटे पहले सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। इस आधार पर 3 मार्च की सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक प्रभावी माना जाएगा। सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है।
पूजा स्थलों के कपाट बंद रखे जाते हैं, भगवान की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता और भोजन पकाने या खाने से बचने की सलाह दी जाती है। बाल या नाखून काटना भी वर्जित माना गया है।
ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाकर होलिका दहन किया जाएगा। पंचांग के अनुसार शाम 6 बजकर 48 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा।
इस प्रकार 3 मार्च का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष संयम और जागरूकता का रहेगा। जहां एक ओर होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है, वहीं चंद्र ग्रहण आत्ममंथन और साधना का अवसर प्रदान करता है।
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