तेल संकट के बीच भारत का साफ संदेश, सस्ता तेल जहां मिलेगा वहीं से होगी खरीद
- ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर की आशंका बढ़ी है
Khabari Chiraiya Desk : पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस तनाव का असर दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी दिखाई दे रहा है। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है और कई देशों में तेल की कीमतों तथा आपूर्ति को लेकर चिंता तेज हो गई है। इसी बीच अमेरिका की ओर से भारत को रूस से तेल खरीदने को लेकर दिए गए संकेतों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
इन परिस्थितियों के बीच भारत सरकार ने शनिवार को स्थिति पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। सरकार ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र नीति अपनाता है और जहां से भी देश को सस्ता और भरोसेमंद कच्चा तेल उपलब्ध होगा, वहीं से उसकी खरीद की जाएगी। सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि मौजूदा वैश्विक तनाव के बावजूद देश की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर बनी हुई है।

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। भारत ने बीते वर्षों में कच्चे तेल के स्रोतों को व्यापक रूप से विविध बनाया है। पहले जहां भारत सीमित देशों से तेल आयात करता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 40 देशों तक पहुंच चुकी है। इससे भारत को कई वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और स्रोत मिल गए हैं, जो किसी एक क्षेत्र में संकट की स्थिति में भी आपूर्ति को बनाए रखने में मदद करते हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए तेल खरीद के फैसले लेता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव या किसी देश की अनुमति के आधार पर भारत अपनी ऊर्जा नीति तय नहीं करता। बयान में कहा गया कि रूस से कच्चे तेल की खरीद भी इसी नीति के तहत जारी है और फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव आए हैं। उस समय पश्चिमी देशों की ओर से रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे, लेकिन इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल आयात जारी रखा। 2022 के बाद रूस द्वारा दिए गए रियायती दाम और भारतीय रिफाइनरियों की बढ़ती मांग के कारण भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार के अनुसार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए पर्याप्त भंडार भी मौजूद है। भारत के पास फिलहाल 250 मिलियन बैरल से अधिक कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार उपलब्ध है। यह भंडार देश की लगभग सात से आठ सप्ताह की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके साथ ही भारत की कुल रिफाइनिंग क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है, जो वर्तमान घरेलू मांग से भी अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई तथा उसके जवाब में तेहरान की ओर से किए गए कदमों ने खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।
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