June 29, 2026

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गोरखपुर : MMMUT के कुलपति और कुलसचिव पर भ्रष्टाचार का आरोप, पीएमओ के निर्देश पर एचआरडी मंत्रालय ने शुरू की जांच

MMMUT GORAKHPUR

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“MMMUT के कुलपति और कुलसचिव पर आरोप, 11 करोड़ के स्टीमेट को बनाया 25 करोड़”

भ्रष्टाचार में लिप्त दोनों अधिकारियों ने भ्रष्टाचार से जुड़े प्रोजेक्ट का 15 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी से ही करा दिया शिलान्यास

UP: गोरखपुर में शिक्षा के मंदिर MMMUT यानी मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया। खबर यह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के निर्देश पर, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने MMMUT के कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी और कुल सचिव डॉक्टर जय प्रकाश के खिलाफ, भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि ब्रह्म प्रकाश नाम के एक शिकायतकर्ता की शिकायत का पीएमओ ने संज्ञान लेने के बाद इन दोनों लोगों के खिलाफ जांच करने के लिए, एचआरडी मंत्रालय को निर्देशित किया। इसके बाद मंत्रालय ने ऑल इंडिया काउंसिल आफ टेक्निकल एजुकेशन के मेंबर सेक्रेटरी को इस मामले में जांच करने और शिकायतकर्ता को भी जांच की प्रगति रिपोर्ट से अवगत कराने का निर्देश दिया है।

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भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी कुणाल राजा गौतम के हस्ताक्षर से मेंबर सेक्रेटरी को जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ने का पत्र जारी हुआ है। यह पत्र 27 अगस्त 2024 को जारी हुआ और जांच भी प्रक्रियाधीन है। इसके बाद से मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा है।

यही नहीं शिकायतकर्ता ने देश के राष्ट्रपति समेत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और मुख्यमंत्री के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शिकायतों का पुलिंदा भेजा है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि हैरानी की बात है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनपद में ही, तकनीकी शिक्षा के इतने बड़े संस्थान में घोटाले दर घोटाले हो रहे हैं और उसकी शिकायत को उनके कार्यालय स्तर से गंभीरता से नहीं लिया गया…और तो और भ्रष्टाचार में लिप्त दोनों अधिकारियों ने भ्रष्टाचार से जुड़े प्रोजेक्ट का मुख्यमंत्री योगी से ही शिलान्यास करा दिया।

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खबरी चिरईया ने शिकायतकर्ता ब्रह्म प्रकाश से बातचीत की, तब शिकायतकर्ता ने उक्त सभी मामलों की जानकारी दी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने कुल 13 बिंदुओं में भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए शिकायत किया है। इसमें पहला और मूल बिंदु उसने विश्वविद्यालय के कुल सचिव की भूमिका निभा रहे हैं डॉक्टर जय प्रकाश पर केंद्रित किया है, जिनके द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़ी हुईं फाइलों को दबाने का कुचक्र रचा गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि राजभवन के स्पष्ट आदेश के बाद भी उत्तर प्रदेश शासन द्वारा विश्वविद्यालय में स्थाई कुल सचिव की नियुक्ति वर्षों से नहीं की जा रही है और डॉक्टर जय प्रकाश अपनी पहुंच के बल पर कुल सचिव बनकर विश्वविद्यालय की तमाम परियोजनाओं में भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहे हैं।

यही नहीं शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार के मामले में कुलपति जेपी सैनी को भी जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि उनके खिलाफ पूर्व के एक मामले में सीबीआई द्वारा आरोपी बनाया गया था, जिसका जवाब इन्होंने क्या दिया उनके खिलाफ क्या फैसला CBI या शासन ने लिया यह खुद में एक सवाल है?…।

भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत में शुरुआत करते हुए शिकायतकर्ता ने जिक्र किया है कि, परिसर में जो फार्मेसी बिल्डिंग का निर्माण हो रहा है उसमें करीब 14 करोड रुपए का घोटाला हुआ है। कार्यवाहक कुल सचिव जय प्रकाश द्वारा फार्मेसी बिल्डिंग के निर्माण के लिए करीब 11 करोड़ का स्टीमेट पास कराया गया था। उसका टेंडर भी आमंत्रित किया गया। न्यूनतम दर वाली फर्म को 17 फरवरी 2023 को टेंडर भी स्वीकृत किया गया। परंतु 6 माह तक उसकी फाइल को ओपन नहीं किया गया और एक बार फिर से इसका टेंडरिंग कराया गया। फिर पूर्व में चयनित फर्म ही इसके योग्य पाई गई, लेकिन इस निर्माण कार्य को कुल सचिव अपने चहेते फर्म को देना चाहते थे इसलिए, करीब 25 करोड रुपए में इस कार्य को उन्होंने नियमों में हेरा-फेरी करते हुए आवंटित किया और 15 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से शिलान्यास करा दिया।

इसी प्रकार शिकायतकर्ता ने वीएस हॉस्टल रिपेयर कार्य के आवंटन में घोटाले का जिक्र किया है, जिसमें क्षमता वृद्धि के कारण क्लासरूम और केमिकल के साथ सूगर टेक्नोलॉजी भवन निर्माण कार्य के समायोजन में भी 180 लाख की घोटाले का जिक्र अपनी शिकायती पत्र में किया है। उसने पूरी गंभीरता से इन शिकायतों को करने के साथ प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री सभी से इस मामले में एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है और समस्त शिकायतों से संबंधित प्रपत्र भी उसने संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री समेत राज्यपाल और मुख्य न्यायाधीश को भेजा है।

शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत पत्र में 210 क्षमता के महिला छात्रावास के निर्माण कार्य में भी घोटाले का जिक्र किया है, तो कंप्यूटर और फर्नीचर खरीद घोटाले का भी जिक्र करते हुए कहा है कि कार्यवाहक कुल सचिव जय प्रकाश द्वारा रूसा और टेकुप योजना के आवंटन को ही बदल दिया गया और करोड़ों रुपए मूल्य के बिना आवश्यकता के अधोमानक कंप्यूटर खुदरा बाजार से भी बहुत अधिक दर पर खरीदे गए। इस कार्य हेतु मनोविज्ञान के एक टीचर अभिजीत मिश्रा को क्रय अधिकारी नामित किया गया। जबकि ऐसा कोई पद शासन द्वारा न तो स्वीकृत है और न ही कभी इस पद पर कोई चयन प्रक्रिया ही अपना गई है।

कुलसचिव डॉक्टर जय प्रकाश को घेरते हुए उसने शिकायतों के क्रम में लिखा है कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक, प्रशासनिक कार्य लेकर शासन द्वारा नियमित नियुक्त अधिकारियों को किनारे कर, मनमाने अनियमित और फर्जी कार्यों को कराना जयप्रकाश की कार्य संस्कृति बन गई है। जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। शैक्षणिक माहौल शून्य है, रिसर्च बंद है। फर्जी प्रवेश, नकल, फर्जी परीक्षा और डिग्री आम हो गई है। भ्रष्टाचार को मिल बांटकर करने के लिए तमाम ऐसे कार्यों की जिम्मेदारी शिक्षकों, प्रोफेसर को दी गई है जिसके लिए विश्वविद्यालय में नामित अधिकारी और कर्मचारी पहले से तैनात हैं।

मौजूदा कुल सचिव के समय में ही पूर्व में विश्वविद्यालय में बीटेक में 40 एडमिशन फर्जी तरीके से हो गए जिसकी जांच और मामला हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है। यही नहीं छात्रवृत्ति घोटाला भी हुआ है। ऐसे छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई जिनके प्रवेश ही फर्जी थे। उन्हें भी फीस प्रतिपूर्ति के रूप में छात्रवृत्ति दी गई जिन्होंने फीस ही जमा नहीं की थी। इसमें जिला समाज कल्याण अधिकारी गोरखपुर, वित्त नियंत्रक अमर सिंह और कुलपति और शिक्षक पीके सिंह की मिली भगत और सक्रिय सन्लिप्तता है। इसका भी उल्लेख शिकायतकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में किया है।

शिकायतकर्ता ने कार्यवाहक कुल सचिव जयप्रकाश द्वारा वित्त विभाग से मिलकर छात्रों की फीस में भी घोटाले को अंजाम देने का आरोप लगाया है, जिसमें करीब 450 छात्रों के शुल्क में हेरा फेरी का मामला प्रकाश में आया है और 450 करोड रुपए की घोटाले की बात प्रारंभिक तौर पर लिखी गई है। जबकि रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि करीब 800 विद्यार्थियों का पूर्व में शुल्क ही नहीं जमा हुआ है यह घोटाला और भी बड़ा है।

इसी प्रकार मौजूदा कुलपति जेपी सैनी जब इस संस्थान में प्राचार्य थे, तब उन्होंने कार्यदायी संस्था आरईएस से लगभग 6 करोड रुपए के निर्माण कार्य अनियमित ढंग से कराए थे। कार्य पत्रावलियों को छुपा कर उनके द्वारा रखा गया और हरित में प्रस्तुत नहीं किया गया, क्योंकि सभी कार्यों का अग्रिम भुगतान कर दिया गया और उसका समायोजन नहीं लिया गया। इस मामले में विभाग के द्वारा जो बिल उपलब्ध कराया गया उसके योग और दिए गए भुगतान में करीब 70 लख रुपए का अंतर है, जिसका भी बंदरबांट हो चुका है। यह शासकीय धनराशि के गबन का मामला है, इसकी जांच लोक लेखा समिति विधानसभा कर रही थी जिसको झूठी और भ्रामक सूचना देने का प्रयास कुलपति और कुल सचिव के द्वारा किया गया है। यही नहीं निर्माण कार्य के लिए जिस प्रोफेसर को अधिकृत किया गया वह उसके अनुकूल नहीं बताया गया।

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इसके अलावा पेड़ नीलामी घोटाला, जिसमें लगभग 500 पेड़ों की अवैध कटान और नीलामी कर दी गई, और जिसके रिश्वत के बंटवारे के झगड़े में एक कर्मचारी वीरेंद्र चौधरी द्वारा 3 फरवरी 2021 को आत्महत्या भी कर ली गई। यह मामला भी लीपापोती कर निपटा दिया गया। इसी प्रकार आवास के मरम्मत, मैकेनिकल भवन, इलेक्ट्रॉनिक्स भवन, आइटीआरसी भवन निर्माण में भी धन उगाही का आरोप कुल सचिव डॉक्टर जयप्रकाश और कुलपति प्रोफेसर जेपी सैनी पर शिकायतकर्ता ने लगाया है और सभी आरोपों का साक्ष्य उसने अपने शिकायती पत्र के साथ संलग्न करके भेजा है।

उसने लिखा है कि अनियमित कार्यों के अनियमित भुगतान का खेल विश्वविद्यालय में जमकर चल रहा है। जिसमें संस्थान के पूर्व प्राचार्य बीबी सिंह के ऊपर भी आरोप है। यहां के भ्रष्टाचार के मामले में गोरखपुर के पूर्व के एक कमिश्नर के द्वारा भी पत्र शासन को लिखा गया था, उसका भी जिक्र शिकायतकर्ता ने किया है, तो 13 अप्रैल 2011 को उत्तर प्रदेश शासन के प्रशासकीय परिषद के सचिव और उपाध्यक्ष की हैसियत से आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद ने भी तत्कालीन प्राचार्य डॉक्टर जेपी सैनी को, एक पत्र सीबीआई की जांच से जुड़े मामले का भेजा था।

यह सब शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत में जिक्र किया है और संबोधित सभी जिम्मेदार लोगों से मांग किया है कि इसकी जांच गंभीरता से हो तो भ्रष्टाचार के बड़े मामले खुलेंगे और यह लोग बेनकाब होंगे, जो तकनीकी शिक्षा के इस बड़े केंद्र को लूटने का कार्य कर रहे हैं। उसने कहा फिलहाल पीएमओ के निर्देश पर जो जांच चल रही है उम्मीद है कि उससे जरूर काले कारनामों को अंजाम देने वाले लोग बेनकाब होंगे।

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