March 21, 2026

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राष्ट्रपति ने कहा, हमारे समाज में ईमानदारी और अनुशासन को सदियों से जीवन का आधार माना गया है

नई दिल्ली : सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2024 का उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।

नई दिल्ली : सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2024 का उद्घाटन सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।

राष्ट्रपति ने सतर्कता जागरूकता सप्ताह में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश दिया, कहा-भ्रष्ट व्यक्तियों के खिलाफ शीघ्र और सख्त कानूनी कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता और ईमानदारी को समाज का आदर्श बनाने की अपील करते हुए, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2024 का उद्घाटन किया। अपने प्रभावशाली संबोधन में उन्होंने कहा कि हमारे समाज में ईमानदारी और अनुशासन को सदियों से जीवन का आधार माना गया है। मेगास्थनीज और फाह्यान जैसे विदेशी यात्रियों ने भी भारतीयों के सादगीपूर्ण जीवन और अनुशासनप्रियता का जिक्र किया है। ऐसे में इस वर्ष केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) का विषय, ‘राष्ट्र की समृद्धि के लिए ईमानदारी की संस्कृति’, न केवल उपयुक्त है, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक और दृढ़ संकल्पित रहने के लिए प्रेरित करता है।

समाज में विश्वास की भूमिका

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राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक जीवन की नींव विश्वास पर आधारित है। यह समाज में एकता का स्रोत है। सरकार की योजनाओं में जनता का विश्वास ही शासन की शक्ति का आधार है। भ्रष्टाचार न केवल आर्थिक प्रगति में बाधा उत्पन्न करता है, बल्कि समाज में विश्वास को भी कमजोर करता है। यह भाईचारे की भावना पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और देश की एकता व अखंडता पर भी व्यापक असर डालता है। हर वर्ष 31 अक्टूबर को सरदार पटेल की जयंती पर हम देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की शपथ लेते हैं। यह सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि इसे गंभीरता से निभाने की जिम्मेदारी है, जिसे हम सबको सामूहिक रूप से उठाना है।

भारतीय समाज का नैतिक आदर्श

राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिकता भारतीय समाज का आदर्श है। जब कुछ लोग चीजों, धन या संपत्ति के संचय को अच्छे जीवन का मापदंड मानने लगते हैं, तब वे इस आदर्श से भटककर भ्रष्ट गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। सच्ची खुशी उन बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करते हुए स्वाभिमान के साथ जीवन जीने में है।

सफाई अभियान की सफलता से मिली प्रेरणा

उन्होंने कहा कि यदि कोई कार्य सही भावना और दृढ़ संकल्प के साथ किया जाए, तो सफलता निश्चित होती है। कुछ लोग यह मानते थे कि स्वच्छता का स्तर हमारे देश में कभी नहीं सुधर सकता। लेकिन मजबूत नेतृत्व, राजनीतिक इच्छा और नागरिकों के योगदान से स्वच्छता के क्षेत्र में अच्छे परिणाम आए हैं। इसी प्रकार, कुछ लोगों का निराशावादी दृष्टिकोण है कि भ्रष्टाचार का उन्मूलन असंभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत सरकार की ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस’ की नीति से भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त किया जा सकेगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता

राष्ट्रपति ने कहा कि भ्रष्ट व्यक्तियों के खिलाफ शीघ्र और सख्त कानूनी कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यवाही में देरी या कमजोर कदम अनैतिक व्यक्तियों को प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन यह भी आवश्यक है कि हर कार्यवाही को संदेह की दृष्टि से न देखा जाए। हमें इसका ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी कार्यवाही का उद्देश्य समाज में न्याय और समानता की स्थापना हो, न कि द्वेष भावना से प्रेरित।

राष्ट्रपति का यह संदेश न केवल सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी था कि वे ईमानदारी, अनुशासन और नैतिकता को जीवन का आदर्श मानें और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी भूमिका निभाएं।

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