March 21, 2026

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भूकंप संभावित क्षेत्रों में तैयारी की आवश्यकता

हिमाचल प्रदेश में वेधशालाओं का विस्तार और जागरूकता बढ़ाने पर जोर, कांगड़ा भूकंप से मिली सीख

नई दिल्ली : 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप ने हिमालयी क्षेत्र में भूकंपीय जोखिमों की गंभीरता को उजागर किया। इस त्रासदी ने न केवल व्यापक विनाश किया बल्कि क्षेत्र के भौगोलिक और सामाजिक ढांचे पर स्थायी प्रभाव छोड़ा। यह घटना, भूकंप संभावित क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन रणनीतियों और सार्वजनिक जागरूकता के महत्व को रेखांकित करती है।

राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क का विस्तार

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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) देश में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी करने वाली नोडल एजेंसी है। वर्तमान में 166 स्टेशनों वाले राष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए देशभर में भूकंप की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अब इस नेटवर्क में 100 और भूकंपीय वेधशालाएं जोड़ी जाएंगी, जिससे भूकंप की निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जाएगा।

हिमाचल प्रदेश में विशेष ध्यान

हिमाचल प्रदेश में फिलहाल सात स्थायी भूकंपीय वेधशालाएं संचालित हैं। बढ़ती भूकंपीय गतिविधियों के मद्देनजर इनकी संख्या बढ़ाने की योजना पर काम किया जा रहा है। क्षेत्र में बेहतर भूकंप तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमताओं को विकसित करने के लिए सरकार द्वारा सतत प्रयास जारी हैं।

आधुनिक तकनीक का उपयोग और डेटा साझा करना

एनसीएस नियमित अध्ययन और डेटा विश्लेषण के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहा है। यह जानकारी राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर हितधारकों तक पहुंचाई जा रही है। भूकंप से जुड़े सभी आंकड़े एनसीएस की आधिकारिक वेबसाइट (seismo.gov.in) पर उपलब्ध हैं।

मंत्री का वक्तव्य

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में भूकंप संभावित क्षेत्रों में तैयारी को प्राथमिकता देने की बात दोहराई। उन्होंने हिमाचल प्रदेश सहित पूरे देश में भूकंपीय वेधशालाओं के विस्तार और जागरूकता कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने के प्रयासों की जानकारी दी।

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