March 24, 2026

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डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से घबराई गर्भवती महिलाएं, समय से पहले प्रसव की तैयारी

अमेरिका

राष्ट्रपति के नए फैसले से भारतवंशी समुदाय पर असर, जन्म आधारित नागरिकता पर लगाम का खौफ

Khabari Chiraiya Desk: अमेरिका, भारतीयों के लिए हमेशा से सबसे लोकप्रिय प्रवास स्थलों में से एक रहा है। लाखों भारतीय वैध तरीके से अमेरिका में रहते हैं, वहीं हजारों लोग अवैध तरीकों से या वीजा अवधि खत्म होने के बाद भी वहीं बस गए हैं। अमेरिका में बसने वाले भारतीय अक्सर नागरिकता पाने का सपना देखते हैं। लेकिन लंबे ग्रीन कार्ड प्रतीक्षा समय के कारण, वे अपने बच्चों के लिए जन्म आधारित नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) का सहारा लेते हैं।

हालांकि, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुनः चुनाव और उनके द्वारा लिए गए नए फैसलों ने भारतीय समुदाय के लिए परेशानियां खड़ी कर दी हैं। ट्रंप द्वारा जन्म आधारित नागरिकता पर लगाई गई रोक ने उन परिवारों के लिए संकट पैदा कर दिया है जो अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने की उम्मीद कर रहे थे। उनके कार्यकारी आदेश के तहत, 20 फरवरी के बाद जन्म लेने वाले बच्चों को गैर-अमेरिकी माता-पिता के आधार पर स्वचालित नागरिकता नहीं मिलेगी।

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भारतीय महिलाएं क्यों कर रही हैं सी-सेक्शन डिलीवरी का विकल्प?

यह नया कानून लागू होने से पहले, भारतीय महिलाएं जिनकी प्रसव तिथि मार्च या अप्रैल में थी, वे अब सर्जरी के माध्यम से समय से पहले बच्चों को जन्म देने का विकल्प चुन रही हैं। सामान्य परिस्थितियों में जहां महिलाएं सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) को प्राथमिकता देती हैं, वहीं इस कानून से प्रभावित होकर वे सी-सेक्शन कराने को मजबूर हैं। इस फैसले ने भारतीय समुदाय में घबराहट और अनिश्चितता पैदा कर दी है।

नागरिकता कानून में बदलाव के प्रभाव

20 फरवरी के बाद पैदा होने वाले बच्चों के लिए यह फैसला न केवल कानूनी बल्कि भावनात्मक रूप से भी परिवारों को प्रभावित कर रहा है। जन्म आधारित नागरिकता पर रोक के अलावा, इस बदलाव का सबसे बड़ा असर अवैध प्रवासियों पर पड़ने वाला है। अब, बिना वैध दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे लोग निर्वासन के बढ़ते खतरे का सामना करेंगे। यह नीति अमेरिका में प्रवासी भारतीयों की स्थिति को और जटिल बना रही है।

जन्म आधारित नागरिकता पर सवाल

जन्म आधारित नागरिकता एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत किसी भी देश में जन्मे बच्चे को उसके माता-पिता की राष्ट्रीयता या प्रवासी स्थिति से अलग नागरिकता दी जाती है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के इस फैसले ने इस प्रथा को चुनौती दी है। यह कदम सिर्फ भारतीय समुदाय के लिए नहीं, बल्कि दुनिया भर के प्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

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