March 28, 2026

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नई दिल्ली : 272 प्रतिष्ठित नागरिकों के खुले पत्र ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है

  •  वरिष्ठ नागरिकों के खुले पत्र पर अलका लांबा की तीखी प्रतिक्रिया, चुनाव आयोग पर बयानबाज़ी से बढ़ा विवाद

Khabari Chiraiya Desk: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के विरोध में देश के दो सौ बहत्तर प्रतिष्ठित नागरिकों ने एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र ने राष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पत्र में कहा गया है कि संवैधानिक संस्थानों की छवि को कमजोर करना लोकतंत्र के लिए घातक है और राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे आरोपों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

इस पत्र के सामने आने के तुरंत बाद कांग्रेस नेता अलका लांबा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई। उन्होंने एक खबर साझा करते हुए कड़े शब्दों का उपयोग किया। भले ही उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन जिस तरीके से खबर साझा की गई, उससे स्पष्ट था कि उनका निशाना उन्हीं दो सौ बहत्तर नागरिकों पर था जिन्होंने यह खुला पत्र लिखा है।

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पत्र लिखने वाले नागरिकों के समूह में सोलह पूर्व न्यायाधीश, चौदह पूर्व राजदूत, एक सौ तेइस सेवानिवृत्त नौकरशाह, और एक सौ तैंतीस पूर्व सैन्य और अर्धसैनिक अधिकारी शामिल हैं। इन सभी ने कहा कि चुनाव आयोग, सेना और न्यायपालिका जैसी संस्थाएँ निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ अपनी भूमिका निभा रही हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि इन संस्थानों पर बिना आधार वाले आरोप लगाकर लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है।

वरिष्ठ नागरिकों ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि लोकतंत्र की मजबूती सत्य, सेवा और जिम्मेदारी पर आधारित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक विमर्श में गरिमा बनी रहनी चाहिए और किसी भी मुद्दे को तमाशे में बदलने का चलन देशहित में नहीं है।

पत्र में यह चिंता भी जताई गई कि कुछ राजनीतिक नेता चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़े कर रहे हैं, जबकि आयोग लगातार पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभाता आ रहा है। वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि इस तरह के आरोप जनता को भ्रमित करते हैं और संस्थागत भरोसे को नुकसान पहुँचाते हैं। पत्र के साथ दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा और झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक निर्मल कौर का नाम और मोबाइल नंबर दिए गए हैं। पत्र के अंत में हस्ताक्षरों की एक लंबी सूची भी संलग्न है।

वरिष्ठ नागरिकों ने चेतावनी दी है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है और किसी भी राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे कदम उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है पर उसकी मजबूती का आधार यही है कि नेता संस्थाओं का सम्मान करें और विचारों को मर्यादा के साथ रखें।

अलका लांबा की प्रतिक्रिया और वरिष्ठ नागरिकों के इस पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर विपक्ष के नेता के आरोपों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं कांग्रेस नेता की तीखी टिप्पणी ने विवाद को और तेज कर दिया है।

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