बिहार : भव्य शपथ ग्रहण समारोह के साथ गांधी मैदान एक नया इतिहास लिखने जा रहा है
- राज्य की राजनीति में यह क्षण सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि गठबंधन की नई प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है
Khabari Chiraiya Desk: बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले चुकी है। 20 नवंबर को गांधी मैदान भव्य शपथ ग्रहण समारोह के साथ एक नया इतिहास लिखने जा रहा है। राज्य की राजनीति में यह क्षण सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि गठबंधन की नई प्राथमिकताओं का संकेत भी माना जा रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मिलकर पद छोड़ने की घोषणा कर दी। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने नई सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया, जिसके बाद प्रशासनिक गलियारे में नई सत्ता टीम को लेकर चर्चा और तेज हो गई।
नीतीश कुमार के इस्तीफे से कुछ ही समय पहले एनडीए के विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इसके साथ ही भाजपा की ओर से डिप्टी सीएम रहे सम्राट चौधरी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा और इसे व्यापक समर्थन भी मिला। बैठक के बाद तय कार्यक्रम के अनुसार गठबंधन प्रतिनिधि राजभवन पहुंचे और सरकार गठन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

भाजपा ने भी अपने आंतरिक नेतृत्व में कोई बदलाव नहीं करते हुए संकेत दिया है कि पार्टी अनुभव और स्थिरता वाले नेतृत्व को बनाए रखना चाहती है। पार्टी की नव-निर्वाचित विधायकों की बैठक में सम्राट चौधरी को एक बार फिर विधायक दल का नेता और विजय सिन्हा को उपनेता चुना गया। इस प्रस्ताव को रामनारायण मंडल ने रखा और कई अनुभवी विधायकों ने इसका समर्थन किया।
इन निर्णयों के बाद यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि नई सरकार में भी सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे। भाजपा के भीतर इसे सुशील कुमार मोदी के बाद स्थायी नेतृत्व की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों नेता लगातार दूसरी बार इस जिम्मेदारी को निभाने जा रहे हैं।
इस बार भाजपा ने विधानमंडल नेतृत्व भी विधानसभा से चुना है। सम्राट चौधरी पिछले कार्यकाल में विधान परिषद के सदस्य थे, जबकि अब दोनों शीर्ष नेता विधानसभा के सदस्य हैं। इससे पार्टी के भीतर एक और नए चेहरे के लिए विधान परिषद नेतृत्व की संभावना भी खुल गई है।
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