March 21, 2026

खबरी चिरईया

नजर हर खबर पर

कर्नाटक में नेतृत्व पर बढ़ती खींचतान ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाईं

  • उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के बीच सत्ता संतुलन को लेकर असहजता खुलकर सामने आने लगी है

Khabari Chiraiya Desk: कर्नाटक की सत्ताधारी कांग्रेस में सब कुछ सुचारू नहीं चल रहा है। उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अचानक दिल्ली पहुंचने और उनके समर्थक विधायकों की गतिविधियों ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और मजबूत कर दिया है। दावा किया गया था कि वे पार्टी नेतृत्व से महत्वपूर्ण राजनीतिक बातचीत करने आए हैं। इसी बीच, आज शिवकुमार बेंगलुरु में दिखाई दिए और जब उनसे नेतृत्व विवाद पर सवाल हुआ तो उन्होंने इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बताते हुए माहौल शांत दिखाने की कोशिश की।

शिवकुमार ने कहा कि राज्य में कांग्रेस के पास एक सौ चालीस विधायक हैं और सभी नेतृत्व संभालने की योग्यता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समूह बनाने की प्रवृत्ति उनका स्वभाव नहीं है और जो विधायक दिल्ली गए, वे अपनी भूमिका और मौजूदगी को मजबूत करने के उद्देश्य से गए थे। उनके अनुसार किसी को न तो बुलाया गया था और न ही वे स्वयं किसी को साथ लेकर गए।

Advertisements
Panchayat Voice

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्दरमैया ने संकेत दिया कि कैबिनेट में फेरबदल का निर्णय केवल हाईकमान करता है और राज्य के सभी वरिष्ठ नेताओं को इसी दिशा में चलना होगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे आगामी वित्तीय वर्ष का बजट खुद ही पेश करेंगे और अपना कार्यकाल आगे जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि वे पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात करेंगे।

कर्नाटक कांग्रेस में यह टकराव नया नहीं है। पिछले वर्ष चुनाव परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्दरमैया और शिवकुमार आमने सामने थे। अंततः पार्टी ने संतुलन साधने के लिए शिवकुमार को उप मुख्यमंत्री बनाया। उस समय चर्चा थी कि नेतृत्व बदलाव का एक फार्मूला तैयार किया गया है जिसमें कार्यकाल के बीच में सत्ता परिवर्तन हो सकता है, परंतु इस पर न तो आधिकारिक घोषणा हुई और न ही किसी नेता ने इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।

इसी पृष्ठभूमि में सिद्दरमैया का यह कहना कि वे अपना सत्रहवां बजट पेश करेंगे, राजनीतिक संकेतों से भरपूर माना जा रहा है। इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब भी खुद को नेतृत्व की पहली पसंद समझते हैं और पद छोड़ने की किसी भी संभावना से दूर हैं।

कर्नाटक की राजनीति पिछले कुछ महीनों से लगातार इन दो नेताओं के समीकरण पर टिकी हुई है। संगठन नेतृत्व इस तनाव को कब और कैसे संभालेगा, यह आने वाले दिनों में तय करेगा। मगर मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व संतुलन का यह संघर्ष अभी थमता दिखाई नहीं देता।

आगे की खबरों के लिए आप हमारी वेबसाइट पर बने रहें…

error: Content is protected !!