बिहार : नीट छात्रा मौत कांड @ दोषी अब बच नहीं सकेंगे, मुख्यमंत्री ने CBI जांच की सिफारिश की
- परिवार ने यहां तक कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या करने को मजबूर हो सकते हैं
Khabari Chiraiya Desk: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में अब दोषी बच नहीं सकेंगे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस संवेदनशील प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की अनुशंसा की है। कांड संख्या 1426 के तहत दर्ज इस मामले को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और न्यायपूर्ण होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को बचने का मौका न मिले और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।
यह मामला पटना के एक गर्ल्स हॉस्टल से जुड़ा है, जहां छात्रा रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। उसकी मौत के बाद से ही परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हुए। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिजनों ने शुरू से ही इसे साजिश के तहत हत्या करार दिया। यही विरोधाभास पूरे प्रकरण को और गंभीर बनाता रहा।

शुक्रवार को छात्रा के माता-पिता और परिजन पटना पहुंचकर डीजीपी से मिले। उन्हें उम्मीद थी कि उच्च पुलिस अधिकारी से मुलाकात के बाद निष्पक्ष जांच का भरोसा मिलेगा, लेकिन मुलाकात के बाद उनका आक्रोश और गहरा हो गया। परिजनों का आरोप है कि उन्हें आत्महत्या की थ्योरी मानने की सलाह दी गई और एक डायरी दिखाकर यह कहा गया कि छात्रा ने स्वयं जीवन समाप्त किया है। हालांकि परिवार का कहना है कि डायरी में ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है जिससे आत्महत्या की पुष्टि होती हो।
परिजनों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि जब उन्होंने आत्महत्या की बात स्वीकार करने से इनकार किया तो उन पर दबाव बनाया गया। छात्रा की मां का कहना है कि परिवार के सदस्यों के ब्लड सैंपल का हवाला देकर डराया गया और कहा गया कि अगर वे नहीं माने तो जांच का रुख उनके खिलाफ मोड़ा जा सकता है। इतना ही नहीं, यह भी कथित तौर पर कहा गया कि मामला CBI को सौंप दिया जाएगा और उन्हें वर्षों तक न्याय के लिए भटकना पड़ेगा। इन आरोपों ने पूरे मामले को और विवादास्पद बना दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई अहम बिंदुओं पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उन्हें संदेह है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने की कोशिश हो रही है और इसी कारण जांच की दिशा सीमित रखी जा रही है।
छात्रा के माता-पिता ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि अब उन्हें बिहार पुलिस पर भरोसा नहीं रहा। डीजीपी से मुलाकात के बाद कथित तौर पर उन्हें राज्य के गृहमंत्री और डिप्टी सीएम से मिलने का सुझाव दिया गया, लेकिन परिवार निराश होकर जहानाबाद लौट गया। उनका कहना है कि उन्हें किसी राजनीतिक पदाधिकारी से नहीं, बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच से न्याय चाहिए। परिवार ने यहां तक कहा कि यदि न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या करने को मजबूर हो सकते हैं। यह बयान पूरे राज्य को झकझोर देने वाला है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव प्रत्य अमृत, डीजीपी विनय कुमार और पटना एसएसपी कर्तिकेय शर्मा के साथ समीक्षा बैठक की है। सरकार स्तर पर पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। हालांकि परिवार ने डिप्टी सीएम से मिलने से इनकार कर दिया और कहा कि अब उन्हें केवल स्वतंत्र एजेंसी की जांच पर ही भरोसा है।
विशेष जांच दल ने अपनी रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में किसी बड़े आपराधिक षड्यंत्र से इनकार किया गया है। लेकिन परिजन इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं और इसे एकतरफा बताते हुए खारिज कर चुके हैं। इस बीच पटना विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों की छात्राएं भी सड़क पर उतर आईं। मगध महिला कॉलेज से कारगिल चौक तक न्याय मार्च निकाला गया। छात्राओं ने बेटियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए और CBI जांच की मांग दोहराई।
पुलिस ने छात्रा के मोबाइल फोन का डेटा रिकवर कर लिया है और तकनीकी विश्लेषण जारी है। जांच में स्नैपचैट से कुछ महत्वपूर्ण संकेत मिलने की बात कही जा रही है। तीन संदिग्धों पर नजर रखी गई है और DNA रिपोर्ट का इंतजार है। अब तक लगभग 25 लोगों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें हॉस्टल से जुड़े लोग, आने-जाने वाले युवक, छात्रा को अस्पताल पहुंचाने वाले, परिजन और परिचित शामिल हैं। हॉस्टल संचालक के बेटे का भी सैंपल लिया गया है। फॉरेंसिक जांच में छात्रा के कपड़ों से स्पर्म मिलने की पुष्टि के बाद DNA मिलान को केस की निर्णायक कड़ी माना जा रहा है।
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है। अब सबकी निगाहें CBI जांच की औपचारिक स्वीकृति और कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। पटना की यह घटना न केवल एक परिवार के दर्द की कहानी है, बल्कि राज्य में कानून व्यवस्था, छात्राओं की सुरक्षा और जांच तंत्र की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा बन चुकी है।
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