मंगल मिशन में एआई की ऐतिहासिक एंट्री
- नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने जेनरेटिव एआई के निर्देश पर पूरी की ड्राइव, स्पेस टेक्नोलॉजी में नई छलांग
Khabari Chiraiya Desk: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ धरती तक सीमित नहीं रहा। अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी एआई ने अपनी ताकत साबित कर दी है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह पर चल रहे मिशन में जेनरेटिव एआई की मदद से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह पहली बार है जब किसी एआई मॉडल ने दूसरे ग्रह पर मौजूद रोवर की मूवमेंट प्लानिंग में सीधी भूमिका निभाई है।
नासा के मार्स रोवर पर्सीवरेंस ने हाल ही में एंथ्रोपिक द्वारा विकसित एआई चैटबॉट क्लाउड से प्राप्त उच्च स्तरीय नेविगेशन निर्देशों के आधार पर अपनी एक सफल ड्राइव पूरी की। 27 जनवरी को हुई इस ड्राइव को अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। एआई द्वारा दिए गए निर्देशों को पहले सटीक वे-प्वाइंट्स में बदला गया और फिर मंगल ग्रह तक भेजा गया।

सामान्य परिस्थितियों में रोवर को निर्देश देने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसमें वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को लंबे समय तक गणना और विश्लेषण करना पड़ता है। लेकिन इस बार एआई ने टेरेन मैप और वैज्ञानिक लक्ष्य के आधार पर संभावित रास्तों, ढलानों की सीमाओं और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए वे-प्वाइंट्स का क्रम तैयार किया।
नासा की जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी ने इस सफलता की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि एआई द्वारा तैयार मार्ग को मिशन इंजीनियरों ने सावधानीपूर्वक जांचा और आवश्यक सुधार किए। इसके बाद इन निर्देशों को पृथ्वी और मंगल के बीच लगभग 362 मिलियन किलोमीटर की दूरी तय कर रोवर तक अपलिंक किया गया।
यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों में एआई की भूमिका और भी व्यापक हो सकती है। इससे न केवल मिशन प्लानिंग तेज और कुशल होगी, बल्कि मानव हस्तक्षेप की जटिलता भी कम होगी। मंगल की सतह पर एआई की यह पहली निर्णायक भूमिका अंतरिक्ष अनुसंधान के नए युग की शुरुआत मानी जा रही है।
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