- एनडीए विधायक दल ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, हिंसा से जूझ रहे राज्य में अब राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद
Khabari Chiraiya Desk: नई दिल्ली : मणिपुर में बीते वर्ष से लागू राष्ट्रपति शासन को केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के बाद राज्य में फिर से निर्वाचित प्रतिनिधियों के नेतृत्व में सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के तुरंत बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं। एनडीए विधायक दल के नेता वाई. खेमचंद सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात कर नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा प्रस्तुत किया।
भाजपा की प्रदेश इकाई ने भी इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि गठबंधन के विधायकों का समर्थन उनके पास है। राजभवन में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ भी मौजूद रहे। प्रतिनिधिमंडल में विभिन्न क्षेत्रों के विधायक शामिल थे, जिनमें उन जिलों के जनप्रतिनिधि भी थे जहां बीते समय में तनाव की स्थिति अधिक रही थी। इसे राजनीतिक संतुलन और व्यापक समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की घोषणा उस समय की गई थी जब राज्य में गंभीर कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उस दौर में व्यापक हिंसा और अस्थिरता के बीच तत्कालीन मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद राज्य की प्रशासनिक बागडोर केंद्र के अधीन चली गई थी।
60 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अभी जारी है और वर्ष 2027 तक वैध है। ऐसे में निर्वाचित सरकार की वापसी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पुनर्बहाली के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि नई सरकार स्थिरता और संवाद की नीति अपनाती है तो लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
राज्य में अब सबसे बड़ी चुनौती शांति और विश्वास की पुनर्स्थापना है। हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करना, पुनर्वास और विकास योजनाओं को गति देना तथा सभी समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना नई सरकार की प्राथमिकता होगी।
राष्ट्रपति शासन हटने के साथ मणिपुर एक बार फिर राजनीतिक संक्रमण के दौर में प्रवेश कर चुका है। आने वाले दिनों में सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की दिशा और दशा तय होगी।
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