भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की नई दिशा
- अंतरिम फ्रेमवर्क से खुलेगा विशाल अमेरिकी बाजार..निर्यात, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आधार
Khabari Chiraiya Desk : भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए दोनों देशों ने अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है। इसे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला चरण माना जा रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह ढांचा भारतीय निर्यातकों के लिए एक विशाल अवसर लेकर आया है, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों, किसानों और मछुआरों के लिए। उनका दावा है कि इस समझौते से भारतीय उत्पादों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का व्यापक बाजार अधिक सुलभ होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार के अनुसार, इस फ्रेमवर्क के तहत अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत तक लाने पर सहमत हुआ है। इससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी उत्पादों को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही, जेनेरिक दवाओं, रत्न और हीरे तथा विमानन क्षेत्र से जुड़े कुछ उत्पादों पर शुल्क शून्य या बेहद कम स्तर पर लाने की दिशा में सहमति बनी है। इससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

व्हाइट हाउस की ओर से जारी संयुक्त वक्तव्य में इस समझौते को आगामी व्यापक व्यापार समझौते की नींव बताया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम बताया है। दोनों नेताओं का मानना है कि इससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे और कंपनियों को स्थिर बाजार उपलब्ध होंगे।
इस ढांचे के तहत भारत ने भी अमेरिका से आने वाले कई औद्योगिक उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति जताई है। कुछ कृषि और खाद्य उत्पादों, जैसे ज्वार, डिस्टिलर्स ग्रेन्स, फल, मेवे, सोयाबीन तेल और कुछ पेय पदार्थों पर भी शुल्क में राहत दी जाएगी। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश अपेक्षाकृत सरल होगा। हालांकि सरकार का कहना है कि यह संतुलित समझौता है और भारतीय उद्योगों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की गई है।
समझौते में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कुछ पुराने शुल्कों की समीक्षा का भी उल्लेख है। विमान और विमानन उपकरणों पर लगाए गए कुछ टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही गई है। इसी प्रकार ऑटोमोबाइल पार्ट्स और दवा क्षेत्र में विशेष बाजार पहुंच की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई है, जिन पर आगे विस्तृत वार्ता होगी।
रूल्स ऑफ ओरिजिन पर सहमति इस समझौते का एक अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इस डील का लाभ केवल भारत और अमेरिका को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से। साथ ही गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने और तकनीकी मानकों को सरल बनाने पर भी जोर दिया गया है। चिकित्सा उपकरणों, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी उत्पादों और आयात लाइसेंस से जुड़े कुछ नियमों की समीक्षा अगले महीनों में की जाएगी।
आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी सहयोग इस फ्रेमवर्क का एक और महत्वपूर्ण आयाम है। दोनों देश सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, निवेश जांच प्रक्रियाओं को बेहतर करने और नई प्रौद्योगिकियों, विशेषकर डेटा सेंटर, जीपीयू और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसे भविष्य उन्मुख सहयोग का संकेत माना जा रहा है।
इस ढांचे के अंतर्गत भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से ऊर्जा उत्पादों, विमान और विमान उपकरणों, तकनीकी सामान तथा कुछ रणनीतिक कच्चे माल की बड़ी खरीद की योजना भी व्यक्त की है। अनुमान है कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार का कुल स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
सरकार का कहना है कि इस समझौते का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचेगा। निर्यात में वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिलाओं व युवाओं के लिए नए आर्थिक अवसर खुलेंगे। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्रेमवर्क अभी प्रारंभिक चरण है और वास्तविक प्रभाव इस पर निर्भर करेगा कि विस्तृत समझौते में किन शर्तों को अंतिम रूप दिया जाता है।
कुल मिलाकर, यह अंतरिम ट्रेड डील भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को एक नई संरचना देने की दिशा में कदम है। आने वाले महीनों में होने वाली विस्तृत वार्ताएं तय करेंगी कि यह साझेदारी कितनी गहराई और स्थायित्व हासिल करती है।
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