4 मार्च को रंगों की होली, 3 मार्च को होगा होलिका दहन
- ब्रज में 25 फरवरी से शुरू होगा रंगोत्सव, बरसाना से दाऊजी तक गूंजेगा उत्सव
- लड्डू मार, लट्ठमार और फूलों की होली से सजेगा कान्हा का धाम
Khabari Chiraiya Desk: फाल्गुन मास का उल्लास इस वर्ष 4 मार्च 2026 को रंगों की होली के रूप में मनाया जाएगा, जबकि होलिका दहन 3 मार्च की शाम संपन्न होगा। वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि के अनुसार होलिका दहन का शुभ समय 3 मार्च को सायं 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इसके अगले दिन 4 मार्च को देशभर में रंगोत्सव मनाया जाएगा। लेकिन यदि होली की असली छटा देखनी हो तो ब्रजभूमि की ओर रुख करना होगा। कान्हा की नगरी में रंगों का उत्सव एक दिन का नहीं, बल्कि कई दिनों तक चलने वाला आनंद पर्व है। इस बार ब्रज में 25 फरवरी से 5 मार्च तक विविध स्वरूपों में होली का आयोजन होगा, जिसमें परंपरा, भक्ति और लोक संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
रंगोत्सव की शुरुआत 25 फरवरी को बरसाना में लड्डू मार होली से होगी। इस दिन श्रीराधा रानी की नगरी में भक्तों पर लड्डुओं की वर्षा की जाती है, जिसे देखने हजारों लोग उमड़ते हैं। इसके अगले दिन 26 फरवरी को बरसाना में प्रसिद्ध लट्ठमार होली का आयोजन होगा। 27 फरवरी को नंदगांव में लट्ठमार होली खेली जाएगी, जहां राधा-कृष्ण की प्रेम परंपरा जीवंत हो उठती है।

28 फरवरी को वृंदावन में फूलों की होली का उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें गुलाल के साथ पुष्प वर्षा से वातावरण सुवासित हो जाता है। 1 मार्च को गोकुल में छड़ी मार होली खेली जाएगी और 2 मार्च को वहीं होली उत्सव का विस्तार होगा। 3 मार्च को होलिका दहन के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे और 4 मार्च को रंगों की होली पूरे ब्रज में धूमधाम से मनाई जाएगी। 5 मार्च को दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली का आयोजन इस श्रृंखला का समापन करेगा।
ब्रज की लट्ठमार होली केवल एक उत्सव नहीं बल्कि श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम की प्रतीक परंपरा है। इस दौरान महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से पुरुषों पर लाठियां चलाती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं। हर ओर राधे राधे की गूंज और अबीर गुलाल का रंगीन वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भर देता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम से प्रारंभ होकर 3 मार्च तक रहेगी। होलिका दहन के लिए रात्रि काल और पूर्णिमा तिथि का संयोग आवश्यक होता है, इसलिए 3 मार्च की शाम को विधिवत होलिका दहन किया जाएगा।
ब्रज की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि आस्था, लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। यदि इस बार आप कुछ अलग अनुभव करना चाहते हैं तो बरसाना से लेकर नंदगांव और वृंदावन तक फैले इस रंगोत्सव में शामिल होकर जीवन भर की स्मृतियां संजो सकते हैं।
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