बिहार में दुग्ध क्रांति का नया अध्याय
- सात निश्चय-3 के तहत हर गांव में बनेगी दुग्ध समिति। महिलाओं को मिलेगा उद्यमिता का अवसर, पंचायतों तक पहुंचेगा सुधा नेटवर्क
Khabari Chiraiya Desk : बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास के अपने नए खाके में डेयरी क्षेत्र को केंद्र में रखकर एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। सात निश्चय के तीसरे चरण के तहत राज्य में दुग्ध उत्पादन को संगठित ढांचे से जोड़ने का निर्णय लिया गया है, ताकि गांवों की आय बढ़े और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है-कृषि आधारित आय को स्थायी आधार देना और पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय में बदलना।
राज्य के सभी गांवों में दुग्ध समितियों का गठन इस योजना का मुख्य आधार होगा। वर्तमान में बड़ी संख्या में गांवों में समितियां सक्रिय हैं, पर शेष क्षेत्रों को भी अगले दो वर्षों में इस ढांचे से जोड़ने की तैयारी है। इसके माध्यम से गांव स्तर पर ही दूध संग्रह, भुगतान और विपणन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका घटेगी और पशुपालकों को सीधे उचित मूल्य मिल सकेगा। सरकार का मानना है कि जब दूध की खरीद पारदर्शी और समयबद्ध होगी तो उत्पादन में भी स्वाभाविक वृद्धि होगी।

महिला सशक्तिकरण इस पहल का दूसरा महत्वपूर्ण आयाम है। पंचायत स्तर पर दुग्ध बिक्री केंद्रों का विस्तार करते हुए महिलाओं को प्राथमिकता देने की योजना बनाई गई है। जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं को इन केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आय का अवसर मिलेगा और वे उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ेंगी। यह कदम केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में भी प्रभावी साबित हो सकता है।
डेयरी क्षेत्र के विस्तार का असर कई सहायक क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। दूध के परिवहन और संग्रहण के लिए नए लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित होंगे। प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड चेन सुविधाओं में निवेश बढ़ेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधि को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
बिहार पहले से ही दूध उत्पादन में अपनी पहचान बना चुका है, लेकिन अब लक्ष्य उत्पादन बढ़ाने के साथ गुणवत्ता और बाजार विस्तार पर भी है। नीतीश सरकार चाहती है कि राज्य केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में अन्य राज्यों और संभावित निर्यात बाजारों की मांग भी पूरी करे। इसके लिए तकनीकी प्रशिक्षण, पशु स्वास्थ्य सेवाओं और बेहतर नस्ल सुधार कार्यक्रमों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रामीण समृद्धि की इस रणनीति में डेयरी को आर्थिक आधारशिला के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। यदि योजना समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे गांवों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे और कृषि पर निर्भरता का दबाव संतुलित होगा। राज्य सरकार का दावा है कि यह पहल समृद्ध गांव और सशक्त बिहार के लक्ष्य को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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