स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास नोटिस
- नियम 94(सी) के तहत 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर, राहुल गांधी प्रकरण और निलंबन बना मुख्य कारण
Khabari Chiraiya Desk: संसद के भीतर सियासी तापमान उस वक्त और बढ़ गया जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नियम 94(सी) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया। इस नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक सहित कई विपक्षी दलों के 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
लोकसभा सचिवालय को इस नोटिस की वैधता जांचने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश स्वयं स्पीकर ओम बिरला ने दिया है। संसदीय नियमों के अनुसार, नोटिस की जांच के बाद कम से कम 14 दिनों के पश्चात इसे सदन में चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए लोकसभा की कुल सदस्य संख्या का बहुमत आवश्यक होगा, जो मौजूदा समीकरणों में विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

विपक्ष की नाराजगी कई मुद्दों पर केंद्रित है। दो फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े विषय को उठाने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके अलावा सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने से भी विपक्ष आक्रोशित है। विपक्ष का आरोप है कि सदन में उन्हें बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्तापक्ष को खुली छूट प्राप्त है।
नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा गया। कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश, सांसद मोहम्मद जावेद सहित अन्य नेताओं ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया। सचिवालय सूत्रों ने नोटिस प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए कहा है कि नियमों के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि पार्टी ने जो निर्णय लिया है, वह उसी के साथ हैं। दूसरी ओर भाजपा सांसद रवि किशन ने इसे विपक्ष का राजनीतिक नाटक करार दिया और कहा कि भाजपा की चुनावी सफलता से विपक्ष विचलित है।
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